वह करीब ढाई वर्ष पहले वर्क परमिट पर कनाडा गया था और मान्ट्रियल में एक कंपनी में ट्राला चालक के रूप में कार्यरत था। स्वजनों ने बताया कि बेटे को विदेश भेजने के लिए परिवार ने करीब 29 लाख रुपये खर्च किए।
इसके लिए बलवीर सिंह ने अपनी अधिकांश कृषि भूमि भी बेच दी थी। परिवार को बेटे से बड़े सपने थे, लेकिन इस हादसे ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। लवप्रीत ने करीब दस दिन पहले ही अपने परिवार से अंतिम बार बातचीत की थी।
मृतक के परिवार में माता-पिता और एक बहन हैं। बेटे की मौत के बाद घर में मातम पसरा हुआ है। परिजनों ने केंद्र सरकार, पंजाब सरकार, कनाडा सरकार, विदेशों में रह रहे एनआरआई तथा समाजसेवियों से अपील की है कि लवप्रीत सिंह का पार्थिव शरीर पंजाब लाने में सहायता की जाए, ताकि उसका अंतिम संस्कार धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार अपने पैतृक स्थान पर किया जा सके।
पूर्व सीआरपीएफ जवान पिता बलवीर सिंह ने कहा कि बेटे के विदेश जाने के लिए उन्होंने अपनी जमीन तक बेच दी थी। अब परिवार आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की कठिन परिस्थितियों से गुजर रहा है और उन्हें सहयोग की आवश्यकता है।
इस दौरान शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के जिला अध्यक्ष दर्शन सिंह मंडेर ने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की और पार्थिव शरीर भारत लाने के लिए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
उन्होंने कहा कि यदि पंजाब में युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर उपलब्ध हों तो उन्हें मजबूरी में विदेश नहीं जाना पड़े। हादसे में जान गंवाने वाले दूसरे युवक की पहचान योगराज सिंह, निवासी गांव बुताला, नौरंगपुर, जिला अमृतसर के रूप में हुई है।