जत्थेदार ने गुरु साहिब के चरणों में समस्त सिख समुदाय की चढ़दी कला और सुख-शांति के लिए अरदास भी की।
श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने ऑस्ट्रेलिया के वर्जीनिया स्थित गुरुद्वारा दशमेश दरबार की इमारत में आग लगने से हुए नुकसान पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने देश-विदेश में रहने वाली सिख संगत से गुरुद्वारों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की अपील की, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
जत्थेदार ने गुरु साहिब के चरणों में समस्त सिख समुदाय की चढ़दी कला और सुख-शांति के लिए अरदास भी की। इस घटना को गंभीरता से लेते हुए जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने न्यूजीलैंड की सेंट्रल सिख एसोसिएशन के मुख्य सेवादार सरदार दलजीत सिंह को मौके पर पहुंचकर पूरे मामले की जांच करने के निर्देश दिए हैं।
रिपोर्ट श्री अकाल तख्त साहिब को सौंपी जाएगी
उन्होंने कहा कि दलजीत सिंह सिख प्रतिनिधियों के एक दल के साथ गुरुद्वारा दशमेश दरबार, वर्जीनिया पहुंचेंगे और वहां की स्थिति का जायजा लेंगे। इस दौरान विशेष रूप से यह पता लगाया जाएगा कि गुरुद्वारा साहिब में सुशोभित श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पावन बीड़ों की स्थिति क्या है। जांच के बाद पूरी रिपोर्ट श्री अकाल तख्त साहिब को सौंपी जाएगी।
घटना से जुड़ी सभी जानकारी जुटाएं
जत्थेदार ने यह भी निर्देश दिए हैं कि सरदार दलजीत सिंह ऑस्ट्रेलिया के स्थानीय प्रशासन और गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के साथ समन्वय स्थापित कर घटना से जुड़ी सभी जानकारी जुटाएं। वहीं, गुरुद्वारा दशमेश दरबार की प्रबंधन समिति को भी आदेश दिया गया है कि वह पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट श्री अकाल तख्त साहिब के सचिवालय को भेजे।
सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग
ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि आज दुनिया के कई देशों में सिख समुदाय निवास करता है और जहां-जहां सिख बसे हैं, वहां उन्होंने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के प्रकाश के साथ सुंदर गुरुद्वारों की स्थापना की है। ऐसे में इन धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
संयम और चढ़दी कला में रहने की अपील
उन्होंने वर्जीनिया की सिख संगत से धैर्य, संयम और चढ़दी कला में रहने की अपील की। जत्थेदार ने कहा कि गुरुद्वारा दशमेश दरबार में लगी आग के वास्तविक कारणों की पारदर्शी जांच होनी चाहिए।
गुरुद्वारे का पुनर्निर्माण पूरी श्रद्धा व सुरक्षा के साथ हो
उन्होंने कहा कि यदि इस घटना के पीछे किसी तरह की शरारत या साजिश की आशंका सामने आती है तो उसकी भी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके और गुरुद्वारे का पुनर्निर्माण पूरी श्रद्धा व सुरक्षा के साथ किया जा सके।