झारखंड में ‘विधानसभा घेराव’ के दौरान छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर मंगलवार को संसद में सियासी घमासान तेज हो गया।
एनडीए सांसदों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए झारखंड की घटना पर जवाब देने की मांग की। भाजपा सांसद उज्ज्वल निकम ने मीडिया से बात करते हुए आरोप लगाया कि पिछले दो सप्ताह से संसद की कार्यवाही बाधित है और न तो लोकसभा और न ही राज्यसभा में जरूरी मुद्दों पर चर्चा हो पा रही है। उन्होंने कहा कि बहस लोकतंत्र के लिए जरूरी है, लेकिन कांग्रेस पार्टी जिस तरह से सदन की कार्यवाही को बाधित कर रही है, वह शर्मनाक है।
उज्ज्वल निकम ने कहा कि झारखंड में छात्रों की पिटाई के मुद्दे पर विपक्ष चर्चा नहीं कर रहा है और राहुल गांधी को इस मामले पर जवाब देना चाहिए। भाजपा सांसद तरुण चुघ ने राहुल गांधी पर ‘दोहरा रवैया’ अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी सदन से भी भाग रहे हैं और झारखंड में बच्चों पर हुए लाठीचार्ज के मुद्दे पर भी चुप हैं।
चुघ के मुताबिक देश राहुल गांधी की इस दोहरी नीति को देख रहा है और उन्हें संसद में इस मुद्दे पर जवाब देना चाहिए। भाजपा सांसद कंगना रनौत ने भी झारखंड की घटना को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड में छात्रों के साथ हिंसा हो रही है और इस मामले में राहुल गांधी से सवाल किया जाना चाहिए।
रनौत ने दावा किया कि राहुल गांधी चर्चा से इनकार कर रहे हैं। पहले विपक्ष की ओर से कुछ अन्य विरोध प्रदर्शनों पर चर्चा की मांग की गई, लेकिन चर्चा का अवसर मिलने पर भी उसे स्वीकार नहीं किया गया। रनौत ने विपक्ष पर देश और संसद के साथ धोखा करने का आरोप लगाया। भाजपा सांसद अरुण सिंह ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को घेरते हुए कहा कि झारखंड में कांग्रेस की सरकार है और वहां युवाओं की बेरहमी से पिटाई हुई है। उन्होंने सवाल किया कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी झारखंड क्यों नहीं जाते। सिंह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता इस मुद्दे से बच रहे हैं और उन्हें मौके पर जाकर स्थिति देखनी चाहिए। शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने भी विपक्ष पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री झारखंड में छात्रों के विरोध प्रदर्शन से जुड़े मुद्दे पर संसद में चर्चा के लिए तैयार हैं, लेकिन विपक्ष की मानसिकता सदन को चलने देने की नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष झारखंड के मुद्दे पर चर्चा नहीं करना चाहता।