जालंधर कैंट विधानसभा से विधायक परगट सिंह को कांग्रेस सूबा प्रधान बना कांग्रेस ने जट्टसिख की पॉलिटिक्स को बरकरार रखा है।

कांग्रेस ने 16 साल बाद दोआबा क्षेत्र से पार्टी प्रधान बनाया है। इससे पहले 2010 में मोहिंद्र केपी प्रधान बने थे।एक्सपर्ट्स मानते हैं कि परगट सिंह को कांग्रेस का प्रधान बनाया जाना केवल लीडरशिप में चेंज नहीं है, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की रणनीतिक रीसेटिंग भी है। हाईकमान ने उन्हें ऐसे समय पर चुना है, जब पार्टी में गुटबाजी, संगठनात्मक उथल-पुथल और नेतृत्व को लेकर खींचतान लगातार बढ़ रही थी।
जानकार बताते हैं कि सबसे ज्यादा 69 सीटों वाली मालवा बेल्ट से प्रधान बनने की अटकलें ज्यादा थीं। इसके साथ ही माझा बेल्ट के लीडर भी प्रधान की दौड़ में थे, लेकिन आखिरी समय में मुहर निर्विवाद चेहरे परगट सिंह पर लगी। परगट सिंह को चन्नी गुट का करीबी भी माना जाता है। ऐसे में चन्नी गुट भी इसे अपनी जीत के रूप में देख रहा है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि परगट सिंह को सूबा प्रधान बनाने के पीछे एक बड़ा कारण दोआबा में बढ़ रहे बीजेपी के प्रभाव को कम करना भी है। 2 दिन पहले ही जालंधर के ही कैंट हलके के परागपुर में गृह मंत्री अमित शाह रैली कर गए हैं। इससे पहले PM मोदी भी 2 बार जालंधर का दौरा कर चुके हैं।
दोआबा की 23 सीटों को सभी पार्टियां अपने ट्रंप कार्ड के रूप में देख रही हैं। भाजपा यहां पर जनवरी 2026 से ही बढ़त बनाकर चल रही है। चाहे PM नरेंद्र मोदी के डेरा बल्लां आने की बात हो, चाहे आदमपुर एयरपोर्ट का नाम श्री गुरु रविदास महाराज के नाम पर रखने का हो, बीजेपी दोआबा में फ्रंटफुट पर खेल रही थी। इसी खेल में अब कांग्रेस ने पूर्व ओलिंपियन और हॉकी खिलाड़ी परगट सिंह को मैदान में उतारा है।
परगट सिंह ने नए कांग्रेस प्रधान की जिम्मेदारी संभाली है। - फाइल फोटो
परगट सिंह ने नए कांग्रेस प्रधान की जिम्मेदारी संभाली है। – फाइल फोटो
दोआबा को प्रतिनिधित्व देने के कांग्रेस हाईकमान के मायने क्या…
  • गुटबाजी खत्म करने की कोशिश: पूर्व प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग मालवा बेल्ट से आते हैं। इससे पहले प्रताप सिंह बाजवा माझा बेल्ट से आते थे और प्रधान रह चुके हैं। मालवा और माझा बेल्ट से कांग्रेस में पैदा हो रही गुटबाजी को खत्म करने के लिए ही कांग्रेस ने कुछ समय पहले कांग्रेस प्रभारी बदलकर सचिन पायलट को कमान सौंपी थी। चन्नी वर्सेज वड़िंग गुट में चल रही गुटबाजी को खत्म करने के लिए ही हाईकमान ने दोबाआ को प्रतिनिधित्व दिया। परगट सिंह की छवि बेबाक, साफ-सुथरी और आजाद फैसले लेने वाले नेता के रूप में रही है। कांग्रेस हाईकमान उन्हें राजा वड़िंग, चरणजीत सिंह चन्नी, प्रताप सिंह बाजवा और अन्य धड़ों के बीच संतुलन बनाने वाले चेहरे के रूप में देख रहा है।
  • दोआबा में बीजेपी के बढ़ते प्रभाव को रोकना: परगट सिंह दोआबा क्षेत्र से आते हैं और जालंधर कैंट से 3 बार विधायक चुने जा चुके हैं। इस नियुक्ति से कांग्रेस ने दोआबा क्षेत्र में BJP के लागातर बढ़ रहे प्रभाव को भी रोकने की कोशिश की है। दोआबा को प्रतिनिधित्व मिलने से यहां के कांग्रेसियों को नया उत्साह मिलेगा। दोआबा में कांग्रेस का पारंपरिक आधार रहा है, लेकिन आम आदमी पार्टी और भाजपा ने पिछले वर्षों में यहां अपना प्रभाव बढ़ाया है। परगट सिंह की नियुक्ति से कांग्रेस जालंधर, कपूरथला, होशियारपुर और नवांशहर क्षेत्र में कार्यकर्ताओं को फिर से सक्रिय करने की कोशिश कर सकती है।
  • जट्टसिख और क्षेत्रीय समीकरण को साधा: परगट सिंह जट्ट सिख समुदाय से हैं। राजा वड़िंग भी इसी समुदाय से थे, इसलिए सामाजिक समीकरण के स्तर पर कांग्रेस ने बहुत बड़ा बदलाव नहीं किया। पॉलिटिकल एक्सपर्ट डॉ. केके रत्तू का मानना है कि इसका मतलब यह हो सकता है कि हाईकमान ने समुदाय बदलने के बजाय संगठन मजबूत करने पर ज्यादा फोकस किया है। कांग्रेस को मालवा क्षेत्र, शहरी हिंदू वोटर्स, दलित समुदाय और माझा क्षेत्र के नेताओं को साथ लेकर चलना होगा। केवल दोआबा या जट्ट सिख चेहरे पर निर्भर रहना 2027 में काफी नहीं होगा।
  • हॉकी कप्तान वाली छवि का फायदा उठाना: परगट सिंह भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान और ओलिंपियन हैं। यह पहचान उन्हें कांग्रेस के कई नेताओं से अलग बनाती है। पार्टी को इससे युवा मतदाताओं, खेल प्रेमियों और गैर कांग्रेस वर्ग तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है। उनकी सार्वजनिक छवि तीखे भाषणों वाली है। वह लगातार AAP सरकार में लॉ एंड आर्डर, बेरोजगारी, नशा, कृषि संकट और खेल ढांचे के मुद्दे लगातार उठाते हैं।
  • जालंधर कैंट में चुनौती भी बढ़ेगी: प्रदेश अध्यक्ष बनने से परगट सिंह का कद बढ़ा है, लेकिन उनका अपना विधानसभा क्षेत्र भी आसान नहीं रहा। 2017 में उन्होंने जालंधर कैंट सीट बड़े अंतर से जीती थी, लेकिन 2022 में AAP के सुरिंदर सिंह सोढ़ी के खिलाफ उनकी जीत का अंतर घटकर 5,808 वोट रह गया था। प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद इस बार उनके सामने सूबे में संगठन ढांचा खड़ा करने और अपनी सीट बचाए रखने की दोहरी जिम्मेदारी होगी।
पत्नी बोलीं- खिलाड़ी हैं, हर चुनौती को पार करना जानते हैं
विधायक परगट सिंह के पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) के अध्यक्ष बनने की खुशी में उनके घर पर जश्न का माहौल रहा। पत्नी बरिंदर कौर, परिजन और समर्थकों ने ढोल की थाप पर नाच-गाकर खुशी मनाई और एक-दूसरे को बधाई दी।
बरिंदर कौर ने कहा कि उनके परिवार के लिए यह दोहरी खुशी का मौका है। जब उनके पहले पोते तेग का जन्म हुआ था, उस समय परगट सिंह विधायक बने थे। अब दूसरे पोते के जन्म के साथ उन्हें पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनने की जिम्मेदारी मिली है। बरिंदर कौर ने कहा कि परगट सिंह एक खिलाड़ी रहे हैं और उन्हें चुनौतियों का सामना करना अच्छी तरह आता है।
कंफर्म करने के लिए फोन पर की बात
बरिंदर कौर ने बताया कि पहले तो रात में उन्हें भी इधर-उधर से पता चला कि परगट प्रधान बन गए हैं। कार्यकर्ताओं के बधाई के फोन आने लगे तो उन्होंने कंफर्म करने के लिए फोन लगाया। परगट सिंह से उनकी फोन पर करीब पांच मिनट बातचीत हुई है और उन्होंने उन्हें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने पर अपनी शुभकामनाएं दी हैं। बरिंदर कौर ने कहा कि पूरा परिवार इस जिम्मेदारी को लेकर बेहद खुश है और उन्हें विश्वास है कि परगट सिंह पंजाब की जनता की आवाज को मजबूती से उठाते हुए पार्टी को नई दिशा देंगे।
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