नई दिल्ली, (punjabprotv) : पंजाब सरकार ने बेअदबी की घटनाओं के दोषियों को उम्रकैद की सजा देने का प्रावधान वाले दो बिल पारित कर राष्ट्रपति की मंजूरी को भेजे थे लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हाल ही में पंजाब सरकार को जवाबी पत्र लिखकर कहा है कि पारित बिलों में सजा का प्रावधान कुछ ज्यादा प्रतीत होता है। केंद्र सरकार की इस आनाकानी के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा और पंजाब सरकार द्वारा पांच साल पहले बेअदबी के मामले में पारित दोनों बिलों को राष्ट्रपति की मंजूरी दिलाने का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री मान ने अमित शाह को लिखे पत्र में कहा है कि पंजाब में धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी एक बड़ा मुद्दा बन चुकी है। इस संदर्भ में यह महसूस किया गया था कि धार्मिक ग्रंथों के बेअदबी के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 295 और 295-ए के तहत निर्धारित सजा अपर्याप्त है इसलिए पंजाब विधानसभा ने दो बिल- ‘द इंडियन पैनल कोड (पंजाब संशोधन) बिल 2018’ और ‘द कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर (पंजाब संशोधन) बिल 2018’, जिनमें लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के उद्देश्य से श्री गुरु ग्रंथ साहिब, श्रीमद्भगवत गीता, पवित्र कुरान और पवित्र बाइबल की बेअदबी, नुकसान पहुंचाने या फाड़ने की घटनाओं के दोषियों को उम्रकैद की सजा का प्रावधान किया गया था।
मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा कि ‘इस संदर्भ में, मैं आपके ध्यान में लाना चाहता हूं कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को सिखों द्वारा एक जीवित गुरु माना जाता है और उसी के अनुसार उनका सम्मान किया जाता है, इसलिए प्रस्तावित सजा अत्याधिक नहीं है। सीमावर्ती राज्य होने के कारण पंजाब में सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। इसे बिगाड़ने की कोशिश करने वाले अपराधियों को रोकने के लिए कड़ी सजा की आवश्यकता है। इस वजह से उक्त विधेयकों पर यथाशीघ्र राष्ट्रपति की स्वीकृति दिलाई जाए।’