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Pakistan Election: पाकिस्तान में काउंटिंग के बीच दोबारा होगा चुनाव!

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पाकिस्तान में 8 फरवरी को नेशनल असेंबली चुनाव हुआ था, आज इस देश में मतदान हुए 60 घंटे से भी ज्यादा का समय हो चुका है लेकिन बावजूद इसके अब तक पूरा परिणाम नहीं आया है. भारी कंफ्यूजन और तमाम शिकायतों के बीच अब पाक चुनाव आयोग ने फिर से कई सीटों पर चुनाव कराने का ऐलान किया है. दरअसल पाकिस्तान चुनाव आयोग (ईसीपी) के पास कई सीटों पर मतदान सामग्री छीनने और उसे नुकसान पहुंचाने जैसी शिकायतें आई थी जिसके बाद आयोग ने देश के कई मतदान केंद्रों पर फिर से चुनाव कराने का आदेश जारी किया है. हालांकि अब तक जो नतीजे सामने आए हैं उसमें किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिली है. फिलहाल इमरान खान के समर्थक निर्दलीय उम्मीदवार 92 सीटों के साथ सबसे आगे हैं जबकि नवाज की पार्टी 73 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर है.

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो नवाज, बिलावल और कुछ निर्दलीयों को लेकर मिलकर अपनी सरकार बना सकते हैं और अगर ऐसा होता है तो नवाज सरकार चौथी बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बन जाएंगे.

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ऐसे में इस रिपोर्ट में विस्तार से समझते हैं अगर नवाज शरीफ पाकिस्तान के पीएम बनते हैं तो भारत पर क्या असर पड़ेगा…

सबसे पहले समझिए सीटों का गणित 

पाकिस्तान नेशनल असेंबली में कुल 336 सीटें हैं जिसमें से 266 सीटों पर जनता के मतदान के जरिए सीधे चुनाव होता है. बची हुआ 70 सीटों में से 10 सीटें वहां के अल्पसंख्यकों हिंदुओं और ईसाइयों के लिए आरक्षित रहती हैं और 60 सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व रहती है. इस देश के नेशनल असेंबली में किसी पार्टी को बहुमत पाना है तो उसे 169 सदस्यों की जरूरत होती है.

किस पार्टी को कितनी सीटें मिली 

10 फरवरी रात 8 बजे तक की स्थिति के अनुसार इमरान खान समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार को 100 सीटें मिली हैं और इसके साथ ही वह सबसे ज्यादा सीटें जीतने में कामयाब हुए हैं. इसके बाद पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) को 71 सीटें मिलीं, जबकि बिलावल भुट्टो जरदारी की पार्टी (पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी) को 54 सीटें मिलीं हैं और अन्य पार्टियों को 28 सीटें मिली है.

15 फरवरी को इन सीटों पर होगा चुनाव

पाकिस्तान चुनाव आयोग ने 11 फरवरी को एक बार फिर चुनाव करने के ऐलान के साथ उन मतदान केंद्रों की लिस्ट भी जारी कर दी है जहां दोबारा मतदान का आदेश दिया गया है.

1. NA-88 खुशाब-II पंजाब- इस सीट पर भीड़ के द्वारा मतदान सामग्री के नष्ट करने का आरोप है. अब 15 फरवरी को यहां के 26 मतदान केंद्रों पर दोबारा मतदान होगा.

2. पीएस-18 घोटकी-I सिंध- आरोप है कि यहां बीते 8 फरवरी को अज्ञात लोगों ने मतदान सामग्री छीन ली थी. अब इस निर्वाचन क्षेत्र के दो मतदान केंद्रों पर एक बार फिर से वोटिंग होगी.

3. PK-90 कोहाट-I खैबर पख्तूनख्वा- इस निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव के दिन आतंकवादियों ने मतदान सामग्री को नुकसान पहुंचाया था जिसके कारण चुनाव आयोग ने खैबर पख्तूनख्वा के 25 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान कराने का फैसला किया है

अब समझिए नवाज की सरकार बनती है तो भारत पर क्या असर पड़ेगा…

बीते शुक्रवार पाकिस्तान में चुनाव के नतीजों के दौरान नवाज शरीफ ने कहा था कि अगर उनकी सरकार सत्ता में आती है तो वो सभी पड़ोसी देशों के साथ पाकिस्तान के संबंध बेहतर करने की कोशिश करेंगे. उस भाषण के दौरान नवाज ने भारत का नाम तो नहीं लिया लेकिन उन्होंने इशारों मे ये जाहिर जरूर कर दिया कि वह पड़ोसी मुल्कों के साथ दोस्ती का हाथ बढ़ाना चाहते हैं. ये तो हो गई चुनाव नतीजे के दिन की बात. नवाज शरीफ ने प्रचार के दौरान भी कई बार भारत के साथ अच्छे रिश्तों स्थापित करने की बात कही है. उन्होंने प्रचार के दौरान ही अपने एक भाषण में भारत के साइंस सहित अलग अलग क्षेत्रों में तरक्की से सीखने की बात भी कही थी. नवाज पहले भी भारत के साथ अच्छे रिश्ते रखने की कोशिश कर चुके हैं और उनको नुकसान तक उठाना पड़ा है.

क्या कहते हैं कूटनीतिक जानकार

भारत के कूटनीतिक जानकारों का भी कहना है कि अगर भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में नवाज शरीफ एक बार फिर से प्रधानमंत्री बनते हैं तो भारत के साथ रिश्तों के हिसाब से ये एक सकारात्मक पहलू हो सकता है. हालांकि पाकिस्तान की अस्थिर राजनीतिक हालात के कारण भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में बेहतरी आएगी, ऐसा कहना ठीक नहीं होगा. इसके साथ ही कमजोर गठबंधन होने के कारण हर विषय में पाकिस्तान की सेना की ही चलेगा. वहीं मीडिया की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि नवाज शरीफ के पास अपने पड़ोसी देश भारत के साथ मेलजोल बढ़ाने का एक विश्वसनीय ट्रैक रिकॉर्ड है. इतना ही नहीं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नवाज की दोस्ती भी रही है. उनके कार्यकाल के दौरान पीएम मोदी अचानक पाकिस्तान का दौरा कर चुके हैं. पीएम मोदी का ये यात्रा इसलिए भी खास है क्योंकि उस दिन एक दशक बाद किसी भारतीय पीएम की पाक यात्रा थी.

इसी रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि अगर नवाज शरीफ फिर से सत्ता में आते हैं, तो इस बात की ज्यादा संभावना है कि दोनों देशों के बीच व्यापार और पारंपरिक संबंध फिर से बनेंगे. अगर ऐसा होता है तो ये संबंध सुधारने की दिशा में बड़े कदम नहीं होंगे, लेकिन इससे पुलवामा के बाद से दोनों देशों के बीच जो तनाव है उसे कम किया जा सकेगा.

पिछले 3 कार्यकाल के दौरान नवाज का भारत के साथ रिश्ता

साल 1990- नवाज शरीफ को इस बात का श्रेय दिया जाना चाहिए कि उन्होंने अपने पड़ोसी देश भारत के साथ रिश्तों को बेहतर करने की हमेशा ही कोशिश की है. साल 1990 के दशक में  जब नवाज शरीफ दूसरी बार प्रधानमंत्री बने थे. उस वक्त भी उन्होंने कोशिश की थी. भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी लाहौर गये थे. वहां पर दोनों के बीच एक डील हुई, जिसे लाहौर समझौता कहा जाता है. लेकिन उसी वक्त कारगिल की घटना होने के कारण दोनों देशों के रिश्ते फिर खराब हो गये.

साल 2014- इसी साल भारत में एनडीए की सरकार सत्ता में आई थी. शपथ ग्रहण समारोह के दौरान सार्क देशों के सभी राष्ट्राध्यक्ष को निमंत्रण भेजा गया था. उस दौरान पहली बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज सपरिवार भारत  शपथ ग्रहण में पहुंचे थे.

वहीं दूसरी तरफ शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने से पहले पाकिस्तान में उन्होंने कहा था कि वह भारत के साथ अच्छे रिश्ते चाहते हैं. उन्होंने मीडिया को दिए एक बयान में कहा था, ‘मैं नई दिल्ली शांति का संदेश लेकर जा रहा हूं.’

साल 2015 – 25 दिसंबर 2015, पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ के 66 वे जन्मदिन पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनसे मुलाकात करने पाकिस्तान पहुंचे थे. पाकिस्तान में लाहौर एयरपोर्ट पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. इसी दिन पीएम मोदी नवाज के रायविंड महलनुमा घर पर भी गए थे. वाजपेयी के बाद पीएम मोदी पहले प्रधानमंत्री थे जिन्होंने पाकिस्तान की यात्रा की थी.

इतना ही नहीं साल 2020 में पीएम नरेंद्र मोदी की मां के निधन पर भी नवाज शरीफ शोक व्यक्त कर चुके हैं. इस पर पीएम मोदी ने धन्यवाद भी अदा किया था. उन्होंने नवाज शरीफ को पत्र लिखा और 2015 में रायविंड में शरीफ के घर जाने पर उनके साथ हुई बातचीत को याद किया, जबकि मोदी के दौरे के बाद पठानकोट पर हमला हुआ था, लेकिन उन्होंने नवाज शरीफ की छवि खराब नहीं मानी. शरीफ ने इमरान खान की तरह भारत के खिलाफ कभी गलत बयानबाजी नहीं की है. इमरान खान की मोदी के खिलाफ असंयमित बयानों ने भी भारत और पाकिस्तान के बीच माहौल खराब किया और बातचीत नहीं होने दी.

भारत से दोस्ती के लिए शरीफ को इन पर देना होगा ध्यान!

अगर नवाज शरीफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बनते हैं तो उन्हें भारत से अच्छे संबंध स्थापित करने के लिए आतंकवाद भारत के रुख को ध्यान में रखना होगा और ठोस कदम उठाने होंगे. नवाज को जम्मू-कश्मीर के मामले में भी अपनी सोच बदलनी होगी. उसे अनुच्छेद 370 को वापस लेने की पूर्व शर्त को छोड़ना होगा. नवाज शरीफ को यह भी स्वीकार करना होगा कि पाकिस्तान ने अपने उच्चायुक्त को वापस बुलाकर और भारत के साथ व्यापार बंद करके अच्छा नहीं किया. यदि शरीफ ऐसा करते हैं तो माना जा रहा है कि भारत की तरफ से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल सकती है.

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