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Jalandhar Railway Station में जोरदार धमाका, जान बचाकर भागे यात्री और स्टाफ

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इस दौरान नीचे खड़े लोग व ऊपर काम कर रहे कर्मचारी घबरा गए, और जान बचाकर इधर-उधर भागने लग पड़े।

 जालंधर रेलवे स्टेशन पर उस समय अफरा-तफरी मच गई जब प्लेटफार्म की शैड पर तारों को हटाते वक्त जोरदार ब्लास्ट हुआ, जिसने शैड को फाड़ दिया।  इस दौरान नीचे खड़े लोग व ऊपर काम कर रहे कर्मचारी घबरा गए, और जान बचाकर इधर-उधर भागने लग पड़े।
दुर्घटना स्टॉफ व यात्रियों के लिए बड़े हादसे का कारण बन सकती थी, लेकिन गनीमत रही कि हादसा किसी तरह से टल गया। इस सबमें बड़ी चूक सामने आई है, जोकि अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रही है।
जानकारी मुताबिक दोपहर 2.50 के करीब प्लेटफार्म 2 व 3 पर बनी शैड की ड्रेन पाईप ब्लॉक हो गई। इसके चलते छत्त से पानी गिरने लगा और यात्रियों को परेशानियां पेश आनी लगीं। सूचना संबंधी आई.ओ.डब्ल्यू विभाग को सूचना दी गई। इस पर संबंधित विभाग के जे.ई. दिलेश्वर सिंह अपने 10-12 कर्मचारियों के साथ प्लेटफार्म-2 पर पहुंचे।
स्टॉफ ने मौके पर आकर देखा तो पता चला कि पाइप में ब्लॉकेज हो चुकी है, जिसके चलते पानी छत्त से गिरने लगा। इस पर कर्मचारी छत्त पर पहुंचे और वहां पर तारों का गुच्छा देखने को मिला। बारिश होने के कारण कर्मचारी तारों को हटाने से डर रहे थे लेकिन सीनियर के कहने पर कर्मचारियों ने तारों को हटाने का प्रयास किया।
कर्मचारियों ने जैसे ही तारों को हटाकर दूसरी तरफ किया तो जोरदार ब्लास्ट हो गया और चिंगारियां निकलती दिखी। ब्ला  जहां पर यह हादसा हुआ उसकी दूसरी तरफ बिजली की हाई वोल्टेज तारें थीं, जिसके चलते कर्मचारी दूसरी तरफ छलांग भी नहीं लगा सकते थे।
कर्मचारियों ने सूझ-बूझ से काम लिया और बारी-बारी से नीचे उतर आए। यह चूक बड़े हादसे का कारण बन सकती थी। वहीं, इस संबंध में अधिकारियों का पक्ष जानना चाहा लेकिन संपर्क नहीं हो सका।
पावर विभाग के स्टॉफ को न बुलाना बड़ी लापरवाही
बताया जा रहा है कि छत्त की सफाई करने के लिए ऊपर गए स्टॉफ द्वारा तारों को हटाने से मना कर दिया गया था, लेकिन उन्हें तारें हटाने के लिए जोर डाला गया।
हालांकि इसके लिए पावर विभाग के स्टॉफ को बुलाना चाहिए था या बिजली को अस्थाई तौर पर बंद करवाकर तारों को हटाने की कोशिश करनी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं किया जिसके चलते यह हादसा हो गया। इससे जानी नुक्सान भी हो सकता था।
जानकारों का कहना है कि विभाग को इस तरह की लापरवाही पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि शैड के नीचे यात्रियों को भी इससे नुक्सान हो सकता था।
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