डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि राज्य परिषद ने संक्रमित मरीजों को उनके घरों से एंटी-रेट्रोवायरल थैरेपी केंद्रों तक महीने में एक बार मुफ्त आने-जाने की सुविधा प्रदान करने का प्रस्ताव भी पेश किया है. उन्होंने एच.आई.वी. से जूझ रहे व्यक्तियों के लिए अनुकूल कार्यक्रम तैयार करने के लिए एक टास्क फोर्स बनाने की योजना बनाने के लिए कहा, जिसका उद्देश्य उनकी रोजगार योग्यता में वृद्धि करना और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने के योग्य बनाना है।
उन्होंने आगे बताया कि बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा लागू की जा रही सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए एंटी-रेट्रोवायरल थैरेपी केंद्र (ए.आर.टी) के मेडिकल अधिकारियों द्वारा प्रमाणित दस्तावेजों को स्वीकार करने पर भी सहमति व्यक्त की गई. इस निर्णय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एच.आई.वी. प्रभावित व्यक्तियों को इन कल्याणकारी कार्यक्रमों के लाभ उठाने में किसी भी प्रकार की बाधा या भेदभाव का सामना न करना पड़े।
डॉ. बलबीर सिंह ने उद्योग और श्रम विभाग को निर्देश दिए कि वे औद्योगिक संस्थानों में एच.आई.वी./एड्स नीति को लागू करने के साथ-साथ 100 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले सभी उद्योगों में पीड़ितों के साथ भेदभाव से संबंधित मुद्दों को हल करने के लिए एक शिकायत अधिकारी नियुक्त करना सुनिश्चित करें। इसके अलावा, सभी उद्योगों से आग्रह किया गया कि वे अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सी.एस.आर.) पहलों में एच.आई.वी. की रोकथाम और इस बीमारी से जूझ रहे व्यक्तियों के लिए कल्याण संबंधी चिंताओं को शामिल करें।
राज्य में एच.आई.वी. परीक्षण शिविर आयोजित करने के बारे में बात करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने इस बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए पूरे राज्य में व्यापक सूचना, शिक्षा और संचार (आई.ई.सी.) अभियान शुरू करने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि लोगों को रोकथाम, देखभाल और सहायता कार्यक्रमों के बारे में जागरूक करना आवश्यक है।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि एच.आई.वी. पीड़ित लोगों को भी सामान्य जीवन जीने का पूरा अधिकार है, और यह समझना जरूरी है कि एच.आई.वी. छूने, हवा या पानी से नहीं फैलता बल्कि असुरक्षित यौन संबंधों, दूषित सुइयों और सिरिंजों के माध्यम से फैलता है. उन्होंने यह भी बताया कि एच.आई.वी. संक्रमित व्यक्ति जो निर्धारित दवाओं का सही तरीके से उपयोग करते हैं और जिनमें वायरस का प्रभाव कम हो गया है, वे स्वस्थ रह सकते हैं और दूसरों के लिए वायरस के प्रसार का खतरा नहीं बनते।
डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि सभी पंचायतें अपनी ग्राम सभा की बैठकों के दौरान एच.आई.वी. पीड़ित लोगों के साथ किसी भी प्रकार के भेदभाव को रोकने के संबंध में प्रस्ताव पारित कर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं. उन्होंने सभी पंचायत भवनों में होर्डिंग्स लगाने और दीवारों पर चित्र बनाने जैसी आई.ई.सी. गतिविधियों को सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।
इस अवसर पर प्रशासनिक सचिव (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, पंजाब) कुमार राहुल, डिप्टी डायरेक्टर जनरल (आई.ई.सी.) नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (नाको) डॉ. अनूप कुमार पुरी, विशेष सचिव (स्वास्थ्य-कम-प्रोजेक्ट डायरेक्टर पंजाब राज्य एड्स कंट्रोल सोसायटी) वरिंदर कुमार शर्मा, निदेशक (रोजगार उत्पत्ति, कौशल विकास और प्रशिक्षण) अमृत सिंह, अतिरिक्त सचिव (स्कूल शिक्षा) परमिंदर पाल सिंह, निदेशक (चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान) डॉ. अवनीश कुमार के अलावा वित्त, स्थानीय निकाय, ग्रामीण विकास, गृह, श्रम, सामाजिक सुरक्षा, महिला और बाल विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी इस बैठक में उपस्थित थे।