देशभर के करोड़ो कर्मचारियों की Salary एक बार फिर बढ़ सकती है।
देशभर के करोड़ो कर्मचारियों को महंगाई भत्ते में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद एक और खुशखबरी मिलने वाली है।
जी हां, अब केंद्र सरकार कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत मिनिमम सैलरी को बढ़ाने पर विचार कर रही है।
अगर सैलरी बढ़ाने का फैसला हुआ तो इसका मकसद कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना होगा।
EPFO के तहत कर्मचारियों का वर्तमान में न्यूनतम वेतन 15 हजार रुपये प्रति महा है।
अगर सरकार ने प्रस्ताव को मंजूरी दी तो यह वेतन 15 से बढ़कर 21 हजार रुपये हो जाएगा, यानी करीब 6 हजार रुपये सैलरी बढ़ जाएगी, लेकिन इसके साथ ही सररकार किसी कंपनी में EPFO के लिए निर्धारित कर्मचारियों की संख्या भी घटा सकती है। नए साल से पहले सरकार कर्मचारियों को यह तोहफा दे सकती है।
साल 2014 में लगा था आखिरी इंक्रीमेंट
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय कंपनियों के साथ इस प्रस्ताव पर विचार विमर्श कर रहा है।
यह बातचीत कर्मचारियों की ग्रोथ और सिक्योरिटी के लिए बनाई गई कमेटी की सिफारियों के बाद शुरू की गई है।
बता दें कि EPFO के तहत वेतन बढ़ाने की मांग कई सालों से लंबित है। अब से पहले साल 2014 में वेतन बदला गया था।
उस समय न्यूनतम वेतन 6500 रुपये से बढ़ाकर 15 हजार रुपये किया गया था।
अब अगर 15000 रुपये में 6 हजार का इजाफा करके न्यूनतम वेतन 21 हजार रुपये किया जाता है तो PF अमाउंट बढ़ेगा और पेंशन भी बढ़ेगी, लेकिन सूक्ष्म और लघु कंपनियां EPFO के तहत कर्मचारियों की संख्या घटाने का विरोध कर रही हैं, क्योंकि इससे उनकी लागत बढ़ सकती है।
EPFO में कितना योगदान?
EPFO के नियमों के अनुसार, PF अकाउंट में कर्मचारी और कंपनी दोनों का शेयर होता है।
दोनों 12-12 प्रतिशत अमाउंट इस खाते में जमा कराते हैं। कंपनी के 12 प्रतिशत अमाउंट में से 8.33% कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में जमा होता। बाकी 3.67% PF खाते में जमा होता है।
10 साल की सर्विस पूरी होने पर पेंशन बन जाती है। वहीं यह पैसा एक साथ निकलवाया जा सकता है।
वहीं बीच में इमरजेंसी पड़ने पर भी पैसा निकलवाया जा सकता है, लेकिन एक साल में पैसा कितनी बार निकलवाया जा सकता है? इसकी सीमा निर्धारित है।