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नीति आयोग की बैठक में पहुंचे CM Mann, बीबीएमबी के साथ उठ सकते हैं ये मुद्दे

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मान केंद्र सरकार के साथ बैठक में राज्य से जुड़े कई संवेदनशील और बड़े मुद्दे उठा सकते हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में नीति आयोग की 10वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक नई दिल्ली में शुरू हो गई है। इसमें सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, उपराज्यपाल, केंद्र शासित प्रदेशों के केंद्रीय मंत्री और नीति आयोग के उपाध्यक्ष, सदस्य और सीईओ ने भाग लिया। इस बैठक में सीएम भगवंत मान भी पहुंचे हैं। इस दौरान उन्होंने भाखड़ा बांध प्रबंधन का मुद्दा उठाया है और इसके पुनर्गठन की मांग कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री मान केंद्र सरकार के साथ बैठक में राज्य से जुड़े कई संवेदनशील और बड़े मुद्दे उठा सकते हैं। इनमें भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड का पुनर्गठन, जल वितरण की समीक्षा, सीमावर्ती जिलों के लिए विशेष पैकेज तथा बकाया केंद्रीय निधियों की मांगें शामिल हैं। सीएम मान के साथ मुख्य सचिव केएपी सिन्हा भी दिल्ली में हैं।
सीएम मान पहले ही इन मुद्दों का जिक्र कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि बीबीएमबी में पंजाब के हिस्से में करीब 3000 पद रिक्त हैं, जिनके लिए जल्द ही भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि केन्द्र व हरियाणा सरकार के सेवानिवृत्त अधिकारियों की नियुक्ति के माध्यम से बीबीएमबी में पंजाब के अधिकार को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी आशंका व्यक्त की कि ऐसे अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं और उन्हें दोबारा तैनात करके पंजाब पर प्रशासनिक दबाव डाला जा रहा है।

जल समझौते की समीक्षा की मांग

सीएम मान ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार दो राज्यों के बीच कोई भी जल समझौता 25 साल बाद समीक्षा योग्य होता है। वे अब पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के बीच जल वितरण के लिए नए मानदंड निर्धारित करने की मांग करेंगे। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि पंजाब हर साल देश के लिए लाखों टन धान, गेहूं, दालें, कपास आदि अनाज पैदा करता है और उसके पास पानी का बड़ा स्रोत है।
आज राज्य के 117 ब्लॉक ‘डार्क जोन’ में पहुंच गए हैं, यानी भूजल स्तर काफी गिर गया है। ऐसी स्थिति में पंजाब को पानी पर विशेष अधिकार दिया जाना चाहिए।

बकाया ₹11,500 करोड़ की धनराशि की मांग

मुख्यमंत्री नीति आयोग की बैठक में केंद्र सरकार द्वारा रोके गए 11,500 करोड़ रुपये में से पंजाब का हिस्सा जारी करने की मांग उठाएंगे। इनमें स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढांचे और किसान कल्याण से संबंधित योजनाओं के लिए सहायता राशि जारी करने से संबंधित मामले शामिल हैं।
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