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ईरान-इसराइल युद्ध बढ़ने से पश्चिम एशिया के साथ भारत का व्यापार होगा प्रभावित

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ईरान-इसराइल युद्ध बढ़ने से पश्चिम एशिया के साथ भारत का व्यापार होगा प्रभावित

ईरान और इसराइल के बीच युद्ध के और बढ़ने से इराक, जॉर्डन, लेबनान, सीरिया और यमन सहित पश्चिम एशियाई देशों के साथ भारत के व्यापार पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा। विशेषज्ञों ने यह राय जताई है। उन्होंने कहा कि युद्ध ने पहले ही ईरान और इसराइल को भारत के निर्यात को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। अमरीका ने रविवार को तड़के ईरान के 3 स्थलों पर हमला किया, जिससे वह इसराइल के युद्ध में शामिल हो गया। उसका उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नष्ट करना है, ताकि एक पुराने दुश्मन को कमजोर किया जा सके, जिससे व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका पैदा हो गई है, क्योंकि ईरान ने अमरीका पर ‘खतरनाक युद्ध’ शुरू करने का आरोप लगाया है।
मुंबई स्थित निर्यातक और टैक्नोक्राफ्ट इंडस्ट्रीज इंडिया के संस्थापक चेयरमैन शरद कुमार सराफ ने कहा, इस युद्ध के कारण अब हम बड़ी मुसीबत में फंस गए हैं। इसका पश्चिम एशियाई देशों के साथ भारत के व्यापार पर व्यापक असर पड़ेगा। सराफ ने कहा कि उनकी कंपनी भी इन दोनों देशों को भेजी जाने वाली खेप रोक रही है। टैक्नोक्राफ्ट इंडस्ट्रीज ड्रम क्लोजर, नायलॉन और प्लास्टिक प्लग, कैपसील क्लोजर और क्लैंप बनाती है। एक अन्य निर्यातक ने कहा कि भारतीय व्यापारी समुदाय पहले से ही इसराइल-हमास संघर्ष और लाल सागर में माल ढुलाई जहाजों पर यमन समíथत हूतियों के हमले के प्रभाव से जूझ रहा है।
इसके कारण भारत से माल ढुलाई लाइन अफ्रीकी महाद्वीप को घेरने वाले ‘केप ऑफ गुड होप’ से खेप ले रही हैं। जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि इस गलियारे में माल ढुलाई लेन, बंदरगाह तक पहुंच या वित्तीय प्रणालियों में कोई भी व्यवधान भारत के व्यापार प्रवाह को बुरी तरह प्रभावित करेगा, माल ढुलाई और बीमा लागत में वृद्धि करेगा, और भारतीय व्यवसायों के लिए नए आपूíत श्रृंखला जोखिम पैदा करेगा। पिछले वित्त वर्ष (2024-25) में ईरान को भारत का निर्यात 1.24 अरब डॉलर रहा, जिसमें बासमती चावल (75.32 करोड़ डॉलर), केला (5.32 करोड़ डॉलर), सोया मील (7.06 करोड़ डॉलर), बंगाल चना (2.79 करोड़ डॉलर) और चाय (2.55 करोड़ डॉलर) शामिल हैं। पिछले वित्त वर्ष में आयात 441.8 अरब डॉलर रहा था। वित्त वर्ष 2024-25 में इसराइल के साथ भारत का निर्यात 2.1 अरब डॉलर और आयात 1.6 अरब डॉलर रहा।
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