मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का वायरल फेक वीडियो को लेकर बयान सामने आया है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का वायरल फेक वीडियो को लेकर बयान सामने आया है। मीडिया द्वारा वायरल फेक वीडियो के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि BJP के पास फेक के अलावा और क्या है? आपको बता दें कि BJP इस वायरल वीडियो पर लगातार सरकार को घेर रही है। वहीं, AAP का आरोप है कि BJP नेता इस वीडियो को वायरल कर रहे हैं।
आम आदमी पार्टी ने X पर एक पोस्ट में कहा, “पंजाब के मुख्यमंत्री का एक AI डीप फेक वीडियो राइट-विंग ट्रोल्स द्वारा शेयर किया जा रहा है। यह एक फेक वीडियो है और कोर्ट ने इसे हटाने का निर्देश दिया है।”
आपको बता दें कि मोहाली की एक कोर्ट ने फेसबुक और गूगल को AI की मदद से बनाए गए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के डीप फेक वीडियो को इंटरनेट से हटाने का आदेश दिया है।
मोहाली की स्टेट साइबर क्राइम पुलिस ने एक व्यक्ति जगमन समरा के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि उसने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री भगवंत मान की फेक वीडियो पोस्ट की है। पुलिस के मुताबिक यह वीडियो एआई (Artificial Intelligence) से बनाई गई है ताकि मुख्यमंत्री की छवि खराब की जा सके।
वीडियो कैसे फैली?
यह वीडियो जगमन समरा के सोशल मीडिया अकाउंट से पोस्ट की गई थी। वीडियो करीब 15 घंटे पहले डाली गई थी। पोस्ट में लिखा गया था। “यह तो ट्रेलर है, जो साबित करेगा कि यह एआई वीडियो है उसे 1 मिलियन डॉलर (करीब 8 करोड़ रुपये) इनाम दूंगा।” इस अकाउंट पर करीब 35 हजार फॉलोअर्स हैं। बताया जा रहा है कि यह अकाउंट काफी पुराना है।
पुलिस की कार्रवाई जारी
पुलिस आईपी एड्रेस (Internet Protocol Address) की जांच कर रही है ताकि यह पता चल सके कि वीडियो कहां से अपलोड हुई। एफआईआर इंस्पेक्टर गगनप्रीत सिंह के बयान पर दर्ज की गई है। पुलिस ने जगमन समरा के खिलाफ बीएनएस की धारा 340, 353(1), 353(2), 351(2), 336(4) और आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया है।
दूसरी पोस्ट में क्या लिखा था…
वीडियो वायरल होने के बाद, 5 घंटे पहले जगमन समरा ने एक और पोस्ट की। इसमें उसने लिखा “यह एआई वीडियो नहीं है। जो साबित करेगा कि यह एआई है, उसे मैं 5 करोड़ रुपये इनाम दूंगा।” उसने यह भी दावा किया कि वह नए साल पर एक और वीडियो जारी करेगा।
साइबर पुलिस के अनुसार यह अकाउंट पुराना और एक्टिव है। इसकी गंभीरता से जांच की जा रही है। पुलिस टीम आईपी ट्रैकिंग और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने में जुटी है कि वीडियो कहां और कैसे तैयार की गई।













