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PoK में बवाल के बीच Pakistan सरकार की बढ़ी टेंशन, Duty पर जाने से जवानों का इनकार

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पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर इस वक्त उबल रहा है.

हिंसक विरोध-प्रदर्शन के कारण एक तरफ जहां पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी पीओके सुलग रहा है. वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान पुलिस के जवान यहां ड्यूटी करने से इनकार कर रहे हैं. यह खुलासा सरकार के एक दस्तावेज से हुआ है. इसके मुताबिक पुलिस के जवान पीओके और गिलिगित में तैनाती मिलने के बावजूद ड्यूटी ज्वॉइन नहीं कर रहे हैं. पाकिस्तान सरकार ने ऐसे पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई शुरू की है.
डॉन अखबार के मुताबिक सोमवार को पीओके में ड्यूटी पर न जाने वाले एक पुलिसकर्मी को नौकरी से बर्खास्त किया गया. पुलिस विभाग अब विस्तृत सूची तैयार कर रही है. आने वाले वक्त में कानून बनाकर ऐसे पुलिसकर्मियों को एक साथ नौकरी से निकालने की तैयारी है.

पीओके में नौकरी करने क्यों नहीं जा रहे जवान?

1. पीओके से दूरी बनाने का एक प्रमुख कारण जान का खतरा है. पीओके इस वक्त उबल रहा है. वहां पर लोग सड़कों पर उतर आए हैं. सोमवार को 4 पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी गई. 7 आम नागरिक भी मारे गए. सैकड़ों लोग घायल हो गए. पिछले 2 साल में यह तीसरा मौका है, जब पीओके में बड़ा बवाल हो रहा है. यहां जान का खतरा सबसे ज्यादा है.
2. पीओके और गिलिगित में वेतन और भत्ता पाकिस्तान के अन्य प्रांतों के मुकाबले काफी कम दिए जा रहे हैं. इसको लेकर सितंबर 2025 में 11 हजार पुलिसकर्मी सड़कों पर उतरे थे. इन पुलिसकर्मियों का कहना था कि 2022 का वेतनमान लागू होने के बाद भी उन्हें 2012 के मॉडल पर पैसे दिए जा रहे हैं.
3. कश्मीर अंग्रेजी की रिपोर्ट के मुताबिक सैलरी भी एक अहम कारक है. पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक कांस्टेबल की प्रतिमाह सैलरी 73000 पाकिस्तानी रुपए है. इसी तरह सिंध में सैलरी के रूप में 69000 प्रतिमाह पैसे मिलते हैं. वहीं पीओके में एक कांस्टेबल की सैलरी प्रतिमाह 15899 पाकिस्तानी रुपए है.

क्यों उबल रहा है पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर?

1947-48 के दौरान कश्मीर के कुछ हिस्सों पर पाकिस्तान ने कब्जा कर लिया, इसे पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर कहा जाता है. इसका क्षेत्रफल करीब 13,300 वर्ग किलोमीटर है. पाकिस्तान ने इसे केंद्रशासित प्रदेश बनाकर रखा है. यहां पर अभी पीपुल्स पार्टी की सरकार है.
पाकिस्तान की सरकार पीओके में चुनाव कराने की तैयारी में है. इससे पहले वहां के लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इन लोगों का कहना है कि पीओके विधानसभा में शरणार्थी कश्मीरियों के लिए जो 12 सीटें आरक्षित हैं, उसे खत्म किया जाए.
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