खालिस्तानी समर्थक सांसद अमृतपाल की पार्टी अकाली दल वारिस पंजाब दे के रजिस्ट्रेशन को विवाद खड़ा हो गया है।

खालिस्तानी समर्थक सांसद अमृतपाल की पार्टी अकाली दल वारिस पंजाब दे के रजिस्ट्रेशन को विवाद खड़ा हो गया है। विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने चुनाव आयोग पर पार्टी का रजिस्ट्रेशन जानबूझकर रोकने का आरोप लगाया है।
उन्होंने कहा कि
पार्टी ने सभी शर्तें पूरी कर ली हैं, लेकिन राजनीतिक दबाव के कारण उन्हें चुनाव चिह्न नहीं दिया जा रहा है। अब चाहे पार्टी को मान्यता मिले या न मिले, लेकिन हमारे उम्मीदवार हर हाल में चुनाव लड़ेंगे। पार्टी में पहले से 2 सांसद और 1 MLA काम कर रहा हैं।
गुरुवार को अयाली ने वीडियो जारी किया है। जिसमें उन्होंने कहा कि पार्टी ने हाईकोर्ट का रुख किया है। जरूरत पड़ने पर वे सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे। आने वाले दिनों में पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिलेगा। जरूरत पड़ने पर दिल्ली के जंतर-मंतर या चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर धरना भी दिया जाएगा।
अब विस्तार से पढ़िए अयाली ने क्या कहा…
  • पार्टी रजिस्ट्रेशन की फाइल चुनाव आयोग के पास: अयाली ने कहा कि पार्टी रजिस्ट्रेशन की फाइल चुनाव आयोग के पास गई हुई है। पार्टी ने सभी शर्तें पूरी कर दी हैं, लेकिन काफी लंबे समय से प्रक्रिया रोकी गई है। पब्लिकेशन फाइनल स्टेज पर थी, जिसके बाद चुनाव चिह्न मिलना था। चुनाव आयोग जानबूझकर रजिस्ट्रेशन रोक रहा है।
  • ऐसी कोई गतिविधि नहीं, जो संविधान के दायरे में नहीं: अयाली ने EC पर मनमानी का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी में पहले से 2 सांसद और 1 MLA काम कर रहा है। रजिस्ट्रेशन से देश की सुरक्षा को खतरा होने की बात कही जा रही है, लेकिन जब से जत्थेबंदी बनी है, तब से ऐसी कोई गतिविधि नहीं हुई जो संविधान के दायरे में नहीं हो।
  • पार्टी को लोगों का बड़ा समर्थन मिल रहा: अयाली ने दावा किया कि पार्टी को लोगों का बड़ा समर्थन मिल रहा है। इसी वजह से विरोधी पार्टियों को खतरा महसूस हो रहा है। उनके मुताबिक, राजनीतिक तौर पर इस बढ़ते जनसमर्थन को रोकने के लिए रजिस्ट्रेशन में देरी की जा रही है।
  • सभी उम्मीदवार आजाद तौर पर चुनाव लड़ेंगे: अयाली ने कहा कि पार्टी ने पहले भी आजाद चुनाव लड़े हैं। अगर रजिस्ट्रेशन नहीं भी होगा तो उनके सभी उम्मीदवार आजाद तौर पर चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने बताया कि सरकार की देरी के विरोध में पार्टी हाईकोर्ट गई है और उन्हें अदालत से इंसाफ की उम्मीद है।
  • पार्टी के साथ हमेशा भेदभाव हुआ: अयाली ने कहा कि पार्टी के साथ हमेशा भेदभाव हुआ है। उन्होंने चंडीगढ़, बंदी सिंखों की रिहाई जैसे पंजाब के मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि इन मामलों में पंजाब के साथ भेदभाव किया गया है। उन्होंने अमृतपाल सिंह पर लगाए गए NSA और उन्हें असम की जेल में रखे जाने का भी जिक्र किया।
  • सिखों में केंद्र सरकार के प्रति रोष: उन्होंने कहा कि इन्हीं कारणों से सिखों में केंद्र सरकार के प्रति रोष है। उन्होंने दावा किया कि आजकल आसानी से पार्टियों का रजिस्ट्रेशन हो जाता है, लेकिन जिस पार्टी के पास 2 सांसद, विधायक और लोगों का बड़ा आधार है, उसे रोका जा रहा है।
  • आपसी शांति और भाईचारा कायम रखना एजेंडा: अयाली ने कहा कि पार्टी का एजेंडा पंजाब से नशा खत्म करना और हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी में आपसी शांति और भाईचारा कायम रखना है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के पास रजिस्ट्रेशन रोकने की कोई ठोस दलील नहीं है।
  • रजिस्ट्रेशन रोकने से लोगों में गुस्सा बढ़ रहा: अयाली ने कहा कि पार्टी को अदालतों पर पूरा भरोसा है और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट भी जाएंगे। चुनाव हर हाल में लड़ने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि उनके पास और भी विकल्प हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह रजिस्ट्रेशन रोकने से लोगों में गुस्सा बढ़ रहा है।
जून 2026 में हाईकोर्ट पहुंची पार्टी
पार्टी ने जनवरी 2025 में रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया था, लेकिन इस पर कोई फैसला नहीं हुआ। इसके बाद जून 2026 में पार्टी ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया। पार्टी की ओर से वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने कोर्ट से चुनाव आयोग को नवंबर के अंत तक आवेदन पर फैसला लेने का निर्देश देने की मांग की थी।
उन्होंने कहा था कि अगर मंजूरी मिल जाती है, तो हमें दिसंबर तक चुनाव चिह्न हासिल करना होगा। हालांकि, हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को सुने बिना कोई निर्देश देने से इनकार कर दिया था।
अमृतपाल अप्रैल 2023 से जेल में बंद
अमृतपाल सिंह ने खुद को खालिस्तानी अलगाववादी नेता जरनैल सिंह भिंडरांवाले की शैली में पेश किया था। उन्हें अप्रैल 2023 में गिरफ्तार किया गया था। इसके दो महीने बाद उनके समर्थकों ने अजनाला पुलिस थाने पर धावा बोल दिया था और अपने साथियों की रिहाई के लिए पुलिस से भिड़ गए थे।
अमृतपाल को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लेकर पंजाब से दूर असम की डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल में रखा गया था। उनकी NSA के तहत हिरासत 22 अप्रैल 2026 को खत्म हो गई थी। इसके बाद उन्हें अजनाला पुलिस थाने पर हमले के मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। वह अभी भी डिब्रूगढ़ जेल में बंद हैं।
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