समंदर में भारत की ताकत और बढ़ने वाली है.

भारतीय नौसेना अब दुश्मन के युद्धपोतों और जमीन पर मौजूद ठिकानों पर दूर से ही सटीक हमला कर सकेगी. सूत्रों के मुताबिक रक्षा मंत्रालय ने इसके लिए मीडियम रेंज लॉइटरिंग म्यूनिशन- LM-MR की खरीद का प्रोसेस शुरू कर दिया है. इसको लेकर Request रिक्वेस्ट फॉर इनफॉर्मेशन यानी RFI जारी की गई है. ये एक तरह का आत्मघाती ड्रोन होगा, जो युद्धपोत से उड़ान भरेगा. हवा में देर तक मंडराएगा और टारगेट मिलते ही उस पर हमला कर देगा. इससे युद्धपोतों की मारक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी.

कैसे काम करेगा ये हथियार?

1. छोटा साइज, युद्धपोत से ही लॉन्च

नौसेना ने साफ किया है कि ये हथियार जहाज पर आसानी से फिट होना चाहिए इसलिए इसका साइज तय किया गया है. लंबाई अधिकतम 2.5 मीटर और विंगस्पैन अधिकतम 3 मीटर. इसे कनस्तर से बूस्टर की मदद से लॉन्च किया जाएगा। इसमें सुरक्षित स्टोरेज के लिए फ्यूलिंग-डीफ्यूलिंग की सुविधा होगी और इमरजेंसी में इसे जहाज से सुरक्षित हटाने के लिए इमरजेंसी जेटिसन फीचर भी होगा.

2. एक ऑपरेटर संभालेगा 10 ड्रोन

इसकी सबसे बड़ी खूबी है इसका नेटवर्क. ये सीधे युद्धपोत के Combat Management System – CMS से जुड़ेगा। इसमें NavIC, GNSS, Gyro और Anemometer सिस्टम लगे होंगे. इसकी सबसे खास बात है क्रॉस-प्लेटफॉर्म हैंडओवर। यानी एक युद्धपोत से लॉन्च किया गया ड्रोन उड़ान के बीच में ही दूसरे युद्धपोत के कंट्रोल में जा सकता है.
इसे ओपन-आर्किटेक्चर कंसोल से कंट्रोल किया जाएगा, जहां एक ही ऑपरेटर एक साथ 10 ड्रोन को ऑपरेट कर सकेगा. इसमें पहले से कई रास्ते फीड किए जा सकेंगे, जिससे ये अपने आप उड़ान भरेगा. दुश्मन के जैमिंग करने पर भी ये GNSS के बिना भी काम करेगा.

3. समंदर की हर चुनौती के लिए तैयार

चूंकि इसे समंदर में तैनात रहना है, इसलिए इसे बेहद मजबूत बनाया जा रहा है. ये माइनस 20 डिग्री से लेकर 60 डिग्री तापमान में काम करेगा. 95% नमी और 50 नॉट की तेज हवा में भी इसे जहाज के डेक से लॉन्च किया जा सकेगा. ये नौसेना के 380 से 415 वोल्ट के पावर ग्रिड पर चलेगा.

4. पूरी तरह से मेड इन इंडिया होगा

रक्षा मंत्रालय ने इसे Buy Indian-IDDM और Buy Indian कैटेगरी में रखा है। यानी इसका डिजाइन भारत में ही बना होना चाहिए और इसमें 50 से 60% तक स्वदेशी सामान लगा होना चाहिए। कंपनी को भारत में ही इसके मेंटेनेंस और रिपेयर की सुविधा भी देनी होगी. इस सिस्टम की लाइफ कम से कम 10 साल होनी चाहिए और कंपनी को ड्रोन के साथ लॉन्चर, कंट्रोल कंसोल, डेटा टर्मिनल और ट्रेनिंग के लिए सिम्युलेटर भी देना होगा. हिंद महासागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए ये हथियार नौसेना के लिए गेमचेंजर साबित होगा. इससे बिना बड़े मिसाइल दागे, कम लागत में दुश्मन के छोटे युद्धपोत, रडार स्टेशन और तटीय ठिकानों को नष्ट किया जा सकेगा.
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