यहां एक प्रेस बयान जारी करते हु अकाली दल के वरिष्ठ नेता डाॅ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि पेपर लीक में शामिल लोगों को कड़ी सजा दिलाने की बहुत जरूरत है, लेकिन कहा कि केवल सजा से सार्वजनिक परीक्षाओं की निष्पक्षता की गारंटी नही दी जा सकती।
डाॅ. चीमा ने कहा कि सहकारी संघवाद की सच्ची भावना के साथ केंद्र सरकार को राज्यों को अपनी भर्तियों और संस्थानों के लिए परीक्षा आयोजित करने के लिए सशक्त बनाते हुए समान राष्ट्रीय सुरक्षा मानक तैयार करने चाहिए। उन्होने कहा,‘‘ मजबूत राष्ट्रीय एसओपी के साथ विकेंद्रीकरण, प्रणालीगत जोखिम को कम कर जवाबदेही में सुधार करेगा और जनता के विश्वास को मजबूत करने का काम करेगा और इससे लाखों ईमानदार छात्रों की आकांक्षाओं की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।’’
वरिष्ठ अकाली नेता ने कहा कि इस बीच कानून में निवारक उपायों पर समान रूप से जोर देना चाहिए- मजबूत एसओपी, सुरक्षित प्रोद्योगिकी, एंड-टू-एंड जवाबदेही, नियमित सुरक्षा आॅडिट और फुलप्रूफ परीक्षा प्रोटोकाॅल ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि डेटा लीक ही न हो। उन्होने कहा,‘‘ भारत का विशाल भूगोल, भाषाई विविधता, अलग-अलग बुनियादी ढ़ांचे और प्रौद्योगिकी के स्तर और हजारों परीक्षा केंद्रों में गोपनीय प्रश्नपत्र पहुंचाने की भारी तार्किक चुनौती ही अत्यधिक केंद्रीकृत परीक्षाओं में स्वाभाविक रूप से असुरक्षित होने का कारण बनता है।’’