विपक्षी दलों के विधायक भी देंगे जवाब
सिर्फ सत्तारूढ़ दल ही नहीं, बल्कि कांग्रेस के 7 विधायक, शिरोमणि अकाली दल के 2 विधायक और सुल्तानपुर लोधी से निर्दलीय विधायक राणा इंदरप्रताप सिंह भी श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचेंगे। सभी जनप्रतिनिधियों से नए कानून पर उनका पक्ष और समर्थन के आधार को लेकर जवाब मांगा गया है।
क्यों उठे कानून पर सवाल?
अकाल तख्त ने बेअदबी विरोधी कानून को लेकर आपत्ति जताते हुए कहा था कि इस कानून को लागू करने से पहले सिख धार्मिक संस्थाओं और अकाल तख्त से पर्याप्त परामर्श नहीं किया गया। धार्मिक पीठ का मानना है कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब से जुड़े मामलों में किसी भी कानून को अंतिम रूप देने से पहले धार्मिक परंपराओं और संस्थाओं की राय लेना आवश्यक है।
आज होने वाली यह पेशी पंजाब की राजनीति और सिख धार्मिक संस्थाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जनप्रतिनिधि अपने जवाब में क्या तर्क रखते हैं और अकाल तख्त इस पूरे मामले पर आगे क्या रुख अपनाता है।