भारत ने तनाव कम करने और समुद्री आवाजाही बहाल करने की अपील की है.
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर से चरम पर पहुंच गया है. यूएस जहां तेहरान पर ताबड़तोड़ हमले कर रहा है, तो वहीं तेहरान खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी बेस को निशाना बना रहा है. इस बीच भारत ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर चिंता जाहिर करते हुए तनाव कम करने की अपील की है. इसके साथ ही भारत ने हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में कई जहाजों पर हुए हमले की भी निंदा की और बिना किसी रुकावट के आवाजाही और व्यापार को फिर से शुरू करने की मांग की.
पश्चिम एशिया को भारत के लिए अहम क्षेत्र बताते हुए, संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने कहा ‘इस इलाके में चल रहे संघर्ष में कुछ समय के लिए ठहराव के बाद, हमलों का फिर से शुरू होना और तनाव का बढ़ना चिंता की बात है.भारत तनाव को तुरंत कम करने की मांग करता है’.
जहाजों पर हुए हमलों की भारत ने की निंदा
मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पश्चिम एशिया की स्थिति पर आयोजित खुली बहस के दौरान हरीश ने इस महीने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कई जहाजों – जिनमें GFS गैलेक्सी, MT अल बाहिया और MT मोम्बासा शामिल हैं इन पर हुए हमलों की भारत की ओर से कड़ी निंदा की.
बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाने पर जोर
उन्होंने कहा ‘इन हमलों में कई भारतीय नागरिक घायल हुए, जिनमें से कुछ गंभीर रूप से घायल हैं. वहीं एक भारतीय की मौत हो गई और एक लापता हैं. भारत ने हमेशा ही समुद्री यात्रियों को निशाना बनाने और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से होकर होने वाले आज़ाद और सुरक्षित आवागमन में बाधा डालने वाली हिंसा की घटनाओं की निंदा की है’. उन्होंने कहा कि भारत इस क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता के लिए बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाने की पुरजोर वकालत करता है.
हरीश ने कहा कि इस क्षेत्र में कमर्शियल शिपिंग और आम लोगों से जुड़े बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना बंद होना चाहिए. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों के मुताबिक इस क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से होकर आजाद और बिना किसी रुकावट के आवागमन और व्यापार को जल्द से जल्द बहाल किया जाना चाहिए.
टकराव से आवाजाही पर पड़ा असर
ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल के टकराव के बीच, UN ने बताया है कि 6 जुलाई को कमर्शियल जहाज़ों पर हुए हमलों के बाद, ईरान ने 11 जुलाई को होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से बंद करने का ऐलान किया. UN के ‘इकोनॉमिक एंड सोशल कमीशन फॉर एशिया एंड द पैसिफिक’ के मुताबिक, रोजाना होने वाली आवाजाही जो टकराव से पहले 100 से ज़्यादा थी और 7 जुलाई तक सुधरकर 49 हो गई थी. वहीं जुलाई के मध्य तक घटकर 8-15 के स्तर पर आ गई.
‘भारतीयों की सुरक्षा जरूरी’
हरीश ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस इलाके की सुरक्षा और स्थिरता में भारत की बड़ी हिस्सेदारी है. उन्होंने बताया कि भारत का व्यापार और ऊर्जा सप्लाई चेन वेस्ट एशिया क्षेत्र से मज़बूती से जुड़े हैं. उन्होंने बताया कि भारत का इस क्षेत्र के साथ सालाना द्विपक्षीय व्यापार करीब 180 अरब डॉलर का है. इसके अलावा यहां से 31 अरब डॉलर से ज्यादा का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) भारत में आया है.
खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के देशों से भारतीयों द्वारा हर साल 52 अरब डॉलर से अधिक की धनराशि देश भेजी जाती है. उन्होंने कहा कि संबंधों का भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर पड़ता है. खाड़ी क्षेत्र में करीब 1 करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं. उन्होंने कहा उनकी सुरक्षा और भलाई हमारे लिए सबसे ज़रूरी है.
गाज़ा को लेकर जताई चिंता
भारत ने सुरक्षा परिषद से यह भी कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुजपर दुनिया का ध्यान होने के बावजूद, गाज़ा पट्टी में चल रहे गंभीर मानवीय संकट से हमारा ध्यान नहीं भटकना चाहिए. हरीश ने कहा कि आम नागरिकों की जान जाना और आम लोगों के लिए बनी बुनियादी सुविधाओं का नष्ट होना ऐसी गंभीर चिंताएं हैं जिन पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तुरंत और बहुत तेज़ी से कदम उठाने चाहिए.
उन्होंने यह भी कहा कि भारत उन कोशिशों के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है जिनसे फ़िलिस्तीनियों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर असर पड़े.उन्होंने आगे कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एक टिकाऊ और लंबे समय तक चलने वाले राजनीतिक समाधान की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत स्वतंत्र, संप्रभु और व्यावहारिक फिलिस्तीन राष्ट्र का समर्थन करता है, जो सुरक्षित और मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर इजरायल के साथ शांति से रह सके.
यमन और लेबनान पर भी की बात
वहीं भारत ने यमन के मामले में देश की एकता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता दोहराई और इसके आंतरिक मामलों में किसी भी तरह के दखल को खारिज कर दिया. हरीश ने कहा ‘हम समुद्री आवाजाही पर हूतियों के हमलों की भी निंदा करते हैं. बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य और दक्षिणी लाल सागर की सुरक्षा एक साझा अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी है और यह वैश्विक हित का मामला है’.
वहीं लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों पर हो रहे हमलों की भी भारत ने कड़ी आलोचना की. भारत ने कहा कि लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (UNIFIL) के शांति सैनिक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करते हैं और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के आदेशों का पालन करते हैं, इसलिए उन्हें कभी भी निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए. भारत ने UNIFIL शांति सैनिकों पर हुए सभी हमलों की कड़ी निंदा की और इस बात पर जोर दिया कि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए.