जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में शपथ ली.

पंजाब सरकार के विरोध के बीच जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने 7 सितंबर को पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में शपथ ली. पंजाब लोक भवन में पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने उन्हें पद की शपथ दिलाई. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान समारोह में नहीं पहुंचे. हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष समारोह में पहुंचे.
पंजाब राजभवन में मंच पर पंजाब के सीएम भगवंत मान की कुर्सी खाली रही और नीचे पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्रियों और स्पीकर के लिए लगाई गई कुर्सी भी खाली रही. हालांकि, हरियाणा सरकार के मंत्री और विधानसभा स्पीकर कार्यक्रम में पहुंचे.

इलाहाबाद में भी रह चुके हैं जज

जस्टिस मिश्रा ने बतौर एडवोकेट, 8 मई, 1993 को अपना एनरोलमेंट कराया था. फिर 2013 में वो सीनियर एडवोकेट बने. उन्होंने 3 फरवरी, 2014 को एडिशनल जज और 1 फरवरी, 2016 को इलाहाबाद में परमानेंट जज के तौर पर शपथ ली. बाद में, उनका ट्रांसफर चंडीगढ़ के पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में कर दिया गया. यहां उन्होंने 21 जुलाई, 2025 को अपना कार्यभार संभाला.
पंजाब कैबिनेट ने नोटिफिकेशन के खिलाफ पारित किया था प्रस्ताव
पंजाब कैबिनेट ने रविवार यानी 6 सितंबर को केंद्र द्वारा अश्वनी कुमार मिश्रा को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने के नोटिफिकेशन के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया. कैबिनेट का कहना था कि ये फैसला राज्य सरकार की राय का इंतजार किए बिना लिया गया. इसके साथ ही आरोप लगाया गया कि ये कदम संवैधानिक नियमों और तय प्रक्रियाओं को पूरी तरह से दरकिनार करके उठाया गया.
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अलग-अलग पत्र लिखकर केंद्र से आग्रह किया था. उन्होंने पत्र में कहा था कि वे जस्टिस मिश्रा को शपथ दिलाने की प्रक्रिया को आगे न बढ़ाएं. साथ ही ये भी कहा था कि इस पर आगे की कोई प्रक्रिया को नहीं तब तक के लिए नहीं फॉलो किया जाए, जब तक कि राज्य सरकार की चिंताओं का उचित समाधान न हो जाए.
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