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पटाखा मार्कीट बारिश की भेंट चढ़ी

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जालंधर : बर्ल्टन पार्क में बनाई गई अस्थाई पटाखा मार्कीट बारिश की भेंट चढ़ी नजर आई, इसके चलते कई दुकानदारों में निराशा देखने को मिल रही है। मात्र कुछ समय हुई बारिश से जगह-जगह पानी भरा नजर आ रहा है, वहीं इलाका कच्चा होने के कारण मार्कीट में हर तरफ दलदल का साम्राज्य देखने को मिल रहा है। दुकानदारों का कहना है कि निगम की तरफ से उचित प्रबंध किए गए होते तो ऐसे हालात न बनते, लेकिन अधिकारियों ने इस प्रति ध्यान नहीं दिया जिसके चलते दुकानदारों का लाखों रुपए का नुक्सान हो गया। वहीं, दलदल होने के कारण दो-पहिया वाहनों पर आए कई लोग पटाखे खरीदे बिना ही वापस लौट गए।

मार्कीट के चारों तरफ जगह-जगह पानी भरने के कारण दुकानदारों द्वारा ईंटें मंगवाकर अस्थाई रास्ता तैयार किया गया, ताकि ग्राहकों को दुकानों तक पहुंचने में दिक्कत पेश न आए। इस दौरान दुकानदार डिब्बों के साथ पानी निकालते हुए देखे गए। बारिश से जो हालात बने हुए हैं, उससे पटाखा मार्कीट बुरी तरह से प्रभावित हुई है। सुबह दुकाने खुलने से पहले बारिश होने के कारण कई दुकानों के अंदर पड़े लाखों के पटाखे भीग गए। वहीं विभिन्न पटाखों में सिलन इत्यादि आने के कारण दुकानदारों को भारी नुक्सान उठाना पड़ा। बारिश थमने के बाद दुकाने खुली और पटाखों को बाहर डिस्पले किया गया।

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बारिश भले ही थम चुकी थी लेकिन कल दिनभर बारिश होने की आशंका बनी हुई थी, जिसके चलते दुकानदारों द्वारा पटाखों को तिरपालों इत्यादि से कवर किया गया। जानकारों का कहना है कि ऐसे मौसम में पटाखे ड्राइ प्लेस में रखने की जरूरत होती है। विशेषज्ञों ने कहा कि शनिवार भी बारिश हुई तो पटाखा मार्कीट में अस्थाई दुकानें लगाने वालों को काफी नुक्सान हो सकता है। देर शाम पटाखों की बिक्री में तेजी देखने को मिली।

दुकानदारों ने खुद करवाया था दुकानों का निर्माण: निगम अधिकारी

वहीं, निगम अधिकारियों का कहना है कि दुकानदारों द्वारा निगम पर किसी भी तरह की लापरवाही का आरोप लगाना गलत है। उनका कहना है कि निगम द्वारा अस्थाई मार्कीट लगाने के लिए स्थान दिया गया है। दुकानों का निर्माण एसोसिएशन व दुकानदारों द्वारा अपने स्तर पर करवाया गया था। दुकानदारों द्वारा पानी का छिड़काव करने की मांग रखी गई थी, जिसके चलते संबंधित विभाग को निर्देश दे दिए गए थे। अधिकारियों ने कहा कि दुकानदारों को चाहिए था कि मार्कीट लगाने वाले स्थान को पक्का करवाने का प्रस्ताव रखा जाता, ताकि निगम इसपर कोई कदम उठा सकता।

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