पीजीआई में सामने आए 170 पॉजिटिव मरीजों में सबसे ज्यादा 68 मरीज पंजाब से हैं।
बदलते मौसम के बीच चंडीगढ़ PGI में स्वाइन फ्लू, H3N2 और इन्फ्लूएंजा-B के मरीजों की संख्या में तेजी देखी गई है। PGI आंकड़ों के मुताबिक, 1 जनवरी से 26 अगस्त तक इन संक्रमणों के कुल 170 पॉजिटिव केस सामने आए हैं। इनमें करीब 50% केस सिर्फ अगस्त में सामने आए हैं। कुल मरीजों में 83 पुरुष और 87 महिलाएं हैं। वहीं, 14 साल से कम उम्र के 36 बच्चे भी संक्रमण की चपेट में आए हैं।
पीजीआई में सामने आए 170 पॉजिटिव मरीजों में सबसे ज्यादा 68 मरीज पंजाब से हैं। इसके बाद हरियाणा से 34, चंडीगढ़ से 28 और हिमाचल प्रदेश से 20 मरीज सामने आए हैं। उत्तर प्रदेश से 10 और अन्य जगहों से भी 10 मरीज पीजीआई पहुंचे हैं।
PGI चंडीगढ़।
134 वयस्क और 36 बच्चे संक्रमित पीजीआई में सामने आए 170 पॉजिटिव मरीजों में 134 वयस्क हैं। 36 मरीज 14 साल से कम उम्र के बच्चे हैं। यानी कुल संक्रमित मरीजों में बच्चों की संख्या भी काफी है। आंकड़ों के मुताबिक, पुरुषों और महिलाओं में संक्रमण के मामलों की संख्या लगभग बराबर रही। कुल मरीजों में 83 पुरुष और 87 महिलाएं शामिल हैं।
अलग-अलग आंकड़ा उपलब्ध नहीं पीजीआई के आंकड़ों में स्वाइन फ्लू, H3N2 और इन्फ्लूएंजा-B से संक्रमित मरीजों को एक साथ दर्ज किया गया है। इसलिए 170 पॉजिटिव मामलों का आंकड़ा इन तीनों तरह के फ्लू संक्रमणों को मिलाकर है। इनमें से किस संक्रमण के कितने मरीज हैं, इसका अलग-अलग आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
फ्लू से बचने के लिए किन बातों का रखें ध्यान, जानिए…
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बुखार-खांसी के साथ सांस फूले तो रहें सतर्क: फ्लू में आमतौर पर बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिर व शरीर में दर्द और ज्यादा थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ मरीजों में ठंड लगना, कमजोरी और भूख कम लगने की शिकायत भी हो सकती है। बुखार और खांसी के साथ सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, बहुत ज्यादा कमजोरी या हालत बिगड़ने लगे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
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हाथ साफ रखें, खांसी-छींक में सावधानी बरतें: संक्रमण से बचने के लिए हाथों को बार-बार साबुन से धोना, खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकना और बीमार व्यक्ति के बहुत करीब जाने से बचना जरूरी है। फ्लू जैसे लक्षण होने पर भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचना चाहिए। जरूरत पड़ने पर मास्क का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
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डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी: छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों में संक्रमण ज्यादा गंभीर हो सकता है। लक्षण आने पर खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। बदलते मौसम में फ्लू के लक्षणों को नजरअंदाज न करने और जरूरत पड़ने पर समय पर जांच व इलाज कराने पर जोर दिया जा रहा है।