चेक बाउंस के सात मामलों में सजा का सामना कर रहे अभिनेता राजपाल यादव की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान राजपाल यादव की ओर से बताया गया कि 2 करोड़ रुपए जमा करने की शर्त के तहत 1 करोड़ 15 लाख रुपये की रकम का इंतजाम हो चुका है। वहीं, बाकी 85 लाख रुपये जमा करने के लिए एक जमीन के खरीदार का हवाला दिया गया है।
राजपाल यादव के वकील ने कोर्ट को बताया कि अभिनेता की पुश्तैनी जमीन का एक खरीदार मौजूद है और वह 85 लाख रुपये देने के लिए तैयार है। खरीदार और जमीन बेचने वाले राजपाल यादव, दोनों कोर्ट में मौजूद हैं। जमीन की रजिस्ट्री को लेकर फिलहाल दिक्कत आ रही है। पितृ पक्ष चल रहा है और खरीदार अभी सेल डॉक्यूमेंट्स का रजिस्ट्रेशन नहीं कराना चाहता। वह नवरात्रि शुरू होने के बाद रजिस्ट्रेशन कराना चाहता है।
वकील ने कोर्ट को बताया कि इसके बावजूद खरीदार 85 लाख रुपये एडवांस के तौर पर देने के लिए तैयार है, ताकि राजपाल यादव की ओर से जमा की जाने वाली कुल रकम 2 करोड़ रुपये तक पहुंच सके। हम रजिस्ट्री की जरूरत के हिसाब से रकम डिमांड ड्राफ्ट के जरिए जमा कर सकते है।
3 अक्टूबर तक का दिया वक्त
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने बाकी 85 लाख रुपये सोमवार तक आरटीजीएसके जरिए जमा करने के लिए 13 अक्टूबर तक का वक्त दिया। अब अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद होगी।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में राजपाल यादव को 2 करोड़ रुपये जमा करने का आखिरी मौका दिया था। अदालत पहले भी अभिनेता की ओर से भुगतान में देरी और कोर्ट के आदेशों का पूरी तरह पालन नहीं किए जाने पर नाराजगी जता चुकी है।
पत्नी राधा यादव ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती
यह पूरा मामला मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े सात चेक बाउंस से जुड़ा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने इनमें राजपाल यादव को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक मामले में तीन महीने की जेल की सजा सुनाई थी। सभी मामलों की सजा एक साथ चलने का आदेश दिया गया था। हाईकोर्ट के फैसले को राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अब नोटिस जारी किया है और राजपाल यादव को पैसे जमा करने के लिए आखिरी मौका दिया है।
16 साल पहले शुरू हुआ था विवाद
इस विवाद की शुरुआत करीब 16 साल पहले हुई थी। साल 2010 में राजपाल यादव ने बतौर निर्देशक अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ बनाने के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म साल 2012 में रिलीज हुई लेकिन बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो पाई। फिल्म के फ्लॉप होने के बाद राजपाल यादव के लिए कर्ज की रकम वापस करना मुश्किल हो गया। समय बीतने के साथ ब्याज और अन्य रकम जुड़ती गई और यह विवाद करीब 9 करोड़ रुपए तक पहुंच गया।
अदालत ने रकम लौटाने का दिया आदेश
कर्ज चुकाने के लिए दिए गए चेक बाउंस होने के बाद मामला अदालत पहुंच गया। साल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव को मामले में दोषी ठहराया था। इसके बाद मामला अलग-अलग अदालतों से होता हुआ दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंचा। हाईकोर्ट ने भी सातों मामलों में राजपाल यादव की सजा को बरकरार रखा और उन्हें हर मामले में तीन महीने की सजा सुनाई। शिकायतकर्ताओं को रकम लौटाने का आदेश भी दिया गया।
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