जेल में बंद चर्चित जगदीप सिंह उर्फ ‘जग्गू भगवानपुरिया’ की पत्नी अमनदीप कौर पंजाब के सरहदी हलके डेरा बाबा नानक से चुनाव लड़ेंगी।

अमनदीप कौर ने अमेरिका से लौटकर सक्रिय राजनीति में औपचारिक एंट्री मार दी। अमनदीप कौर ने हलके के गांव सर्फकोट में आगामी चुनाव में ‘जग्गू भगवानपुरिया टीम’ के प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में उतरने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। जग्गू इस समय असम की सिलचर सेंट्रल जेल में बंद है।
अमेरिका में डॉक्टरी (डेंटल) की पढ़ाई और वहां की आलीशान जिंदगी को बीच में ही छोड़कर वतन लौटीं अमनदीप कौर ने बेहद आत्मविश्वास के साथ स्पष्ट किया कि वह डेरा बाबा नानक की “बेटी भी हैं और बहू भी”। ऐसे में अपने हलके और घर की सेवा करना उनका नैतिक फर्ज बनता है और अब वह स्थायी रूप से यहीं रहकर जनता के बीच काम करेंगी।
इलाके में लोगों से मिलने पहुंची अमनदीप कौर।
इलाके में लोगों से मिलने पहुंची अमनदीप कौर।
मेरे पति जग्गू नहीं, जगदीप सिंह अठवाल: अमनदीप कौर
इंसानियत की दुहाई: ‘गैंगस्टर’ के ठप्पे और विरोधियों द्वारा मतदाताओं को डराने-धमकाने के आरोपों पर सवाल पूछा गया, तो अमनदीप कौर भावुक होने के साथ-साथ बेहद मुखर नजर आईं। अमनदीप कौर ने कहा “जब कोई जग्गू भगवानपुरिया कहता है तो मेरे दिल से पूछकर देखो। वे जग्गू नहीं, जगदीप सिंह अठवाल हैं। कोई भी मां के पेट से गैंगस्टर पैदा नहीं होता। “
टैग हटाने की अपील: उन्होंने कहा कि ‘गैंगस्टर’ का टैग अब खत्म होना चाहिए और उनके पति को एक आम इंसान (जगदीप सिंह) के रूप में देखा जाना चाहिए।
दिग्गजों को चुनौती: कोई मां के पेट से नेता नहीं बनता, जनता ही बनाती है दिग्गज
कांग्रेस के सुखजिंदर सिंह रंधावा, आम आदमी पार्टी के गुरदीप सिंह रंधावा और बीजेपी के बड़े दिग्गजों से मुकाबले के सवाल पर अमनदीप कौर ने बेबाकी से जवाब दिया कि जो नेता आज अपने आप को दिग्गज कहते हैं, वे मेरे पिता समान और वरिष्ठ हैं। लेकिन कोई भी बचपन से दिग्गज नहीं होता। उन्होंने कहा कि डेरा बाबा नानक की संगत (जनता) का उन्हें भरपूर समर्थन मिल रहा है और इसी प्यार के बल पर उनमें यह सियासी आत्मविश्वास आया है।
इलाके में लोगों से मिलने पहुंची अमनदीप कौर।
इलाके में लोगों से मिलने पहुंची अमनदीप कौर।
मुख्य चुनावी मुद्दे: शिक्षा और रोजगार मिलेगा तो अपने-आप खत्म हो जाएगा नशा
हलके की मुख्य समस्याओं पर बात करते हुए अमनदीप कौर ने अपनी प्राथमिकताएं गिनाईं। उन्होंने कहा कि डेरा बाबा नानक एक सीमावर्ती बेल्ट होने के कारण बेहद पिछड़ा इलाका बन चुका है। यहां न तो बेहतर शिक्षा की व्यवस्था है और न ही अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं। कोई भी बीमार होता है तो उसे सीधे अमृतसर रेफर कर दिया जाता है। आखिर हमारे डेरा हलके में विश्वस्तरीय अस्पताल और स्कूल-कॉलेज क्यों नहीं हो सकते?
बेरोजगारी ही नशे की जड़: उन्होंने कहा कि केवल “नशा-नशा” चिल्लाने से समाधान नहीं होगा। नशे की असली जड़ ‘बेरोजगारी’ है। यदि युवाओं को रोजगार मिल जाए, तो उनका ध्यान नशे की तरफ जाएगा ही नहीं।
बिना लालच समाज सेवा जारी रहेगी: उन्होंने बताया कि उनकी टीम पिछले 6 महीनों से चेयरमैन राजविंदर कौर की अगुवाई में गरीब बेटियों के विवाह, शगुन स्कीम और बच्चों की पढ़ाई के लिए बिना किसी राजनीतिक स्वार्थ के काम कर रही है और यह सेवा चुनाव के बाद भी जारी रहेगी।
पार्टी की टिकट या निर्दलीय लड़ेंगी चुनाव राजनीतिक दल के सिंबल पर चुनाव लड़ने के सवाल पर अमनदीप कौर ने साफ किया कि चुनाव लड़ना शत-प्रतिशत तय है, लेकिन किसी राजनीतिक दल से लड़ना है या निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में, इसका अंतिम निर्णय उनकी टीम और चेयरमैन राजविंदर कौर द्वारा सही समय पर लिया जाएगा।
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