लुधियाना में शाही इमाम ने धार्मिक कथा के दौरान पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा इस्लाम धर्म को लेकर की गई नापाक टिप्पणी पर ऐतराज जताया है।

शाही इमाम पंजाब मुहम्मद उस्मान रहमानी लुधियानवी ने कहा कि पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपने बयान के लिए माफी मांगे। अगर ऐसा नहीं हुआ तो कानूनी कार्रवाई के लिए हो जाएं तैयार। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि पहला मनुष्य तन, दूसरा भारत जैसा वतन उस पर भी पंजाब और तीसरा सौभाग्य सनातन जैसा धर्म मिला। अब मान लो तुम होते तो भैया को भी सैया बनाते। समझ गए हम क्या कहना चाह रहे। अपने मुंह से ज्यादा नहीं बोलेंगे। FIR थोड़ी खानी है। पहले उल्लू थे अब हम बहुत समझदार हो गए हैं। हां अब हम जो है सांप भी मर जाता है, लाठी भी नहीं टूटती है। तो विचार करो बड़े अद्भुत धर्म में तुम्हारा जन्म हुआ। सनातन धर्म में जन्म हुआ।
6 पॉइंट में पढ़ें क्या बोले रहमानी…
  • नफरत भरी बातें किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं: मुहम्मद उस्मान रहमानी लुधियानवी ने कहा कि अल्लाह ताला के नाम से शुरू करता हूं, जो बड़ा मेहरबान और निहायत ही रहम करने वाला है। आज का यह संदेश जो है, वह लुधियाना में आए हुए पंडित धीरेंद्र शास्त्री जी के नाम है। पहले तो मैं उनको यह बताना चाहता हूं कि लुधियाना जो शहर है, यह भारत की जंग-ए-आजादी में और भारत के उद्योग, भारत के आपसी भाईचारे में अपना एक विशिष्ट इतिहास रखता है। हमारे लुधियाना में आए हो… जी आया नूं, लेकिन आप आकर जिस अंदाज के साथ नफरत भरी कुछ बातें की हैं, वह किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जा सकतीं।
  • इस्लाम धर्म के बारे में नापाक इशारे करते हैं: रहमानी ने कहा कि सबसे पहली बात तो यह कि कोई भी धर्म का प्रचारक, चाहे मैं होऊं या कोई और हो उसकी जिम्मेदारी बनती है कि वह लोगों में आपसी भाईचारे, सांझ, प्यार-मोहब्बत का संदेश दे। आप इस्लाम धर्म के बारे में नापाक इशारे करते हैं। स्टेज से यहां तक कहा कि ‘भइया को सइयां बना लेते हैं’। यह एक ऐसी नापाक टिप्पणी है, जिसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और इस्लाम के अंदर इसकी कोई गुंजाइश मौजूद नहीं है।
  • नफरत का प्रचार करने की नाकाम कोशिश: लुधियानवी ने कहा कि यह सुनकर हैरत हुई कि खुद को जिम्मेदार कहने वाला बंदा पंजाब जैसी धरती पर आकर नफरत की बात कर रहा है। जिस धरती पर पहली पातशाही गुरु नानक देव जी ने आपसी भाईचारे का संदेश दिया। जिस धरती पर बाबा फरीद शकरगंज को पंजाबी मां बोली का पहला कवि कहा जाता है और उनकी मोहब्बतें आज भी हवा में मिठास घोलती हैं। जिस धरती पर दशमेश पिता साहिब श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के साथ नबी खां, गनी खां और दूसरी तरफ साहिबजादों की शहादत के साथ दीवान टोडरमल नजर आते हैं। आप उस धरती पर आकर नफरत का प्रचार करने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं।
  • लुधियाने से सूझवान लोग शायद भारत में कहीं नहीं: उन्होंने कहा कि आपने इस दौरान यह भी कहा कि ‘लुधियाना के पागलो’। हो सकता है कि उस पंडाल में बहुत सारे लोग आपकी इस बात से शायद सहमत हों, लेकिन लुधियाने से सूझवान लोग शायद भारत में कहीं नहीं। लुधियाने से ज्यादा मोहब्बत करने वाले शायद भारत में कहीं और नहीं। लुधियाने से ज्यादा बांटने वाले शायद भारत में कहीं और नहीं हैं। आप शायद भूल गए आप पंजाब में आए हो, जहां साईं मियां मीर जी ने श्री हरिमंदिर साहिब की नींव रखी है।
  • चाइना की बात की और उनका मजाक उड़ाया: उन्होंने कहा कि यहां आज भी हिंदू और सिख गांवों में मस्जिदें बनाने के लिए जगह देते हैं। आप पंजाब में आए आपकी आमद पर हमें कोई एतराज नहीं था। जिस अंदाज के साथ आप लोगों को संदेश दे रहे हैं। आपने चाइना की बात की और उनका मजाक उड़ाया। शायद आप यह भी भूल गए कि जिस कैमरे के सामने बात करते पड़े हो, वह भी चाइना का है। जिस माध्यम से लोग आपको सुन रहे हैं, वह भी सब चाइना के हैं।
  • चाइना के लोगों के साथ रोजाना व्यापार करते हैं: आपने अपने पड़ोसी की बेइज्जती करने की कोशिश की, जो दुनिया की सबसे बड़ी डेमोक्रेसी का पड़ोसी है। वह सबसे ताकतवर पड़ोसी है, जिसके साथ अरबों रुपए का कारोबार भारत के लोग करते हैं। लुधियाने वाले खासकर कितना चाइना के लोगों के साथ रोजाना व्यापार करते हैं। आप उनके खिलाफ भी एक ऐसी नापाक टिप्पणी करते हैं।
क्या बोले थे धीरेंद्र शास्त्री, विस्तार से पढ़िए…
  • हली-उल्लाह वालों के पास जाने की जरूरत ही क्या: धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि भारत के सनातनियों, तुम्हें इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं है। तुम्हारे हनुमान जी किसी से कम नहीं हैं। ऐसी कोई गली नहीं, जहां बजरंग बली की चली नहीं। जब इन्होंने लंका में डंका बजा दिया तो ये तो भारत है। तुम्हें हली-उल्लाह वालों के पास जाने की जरूरत ही क्या है। सनातनियों एक बात पक्की मानना-जो अपने बाप को बाप नहीं कहता और पड़ोसी को बाप कहता है, वह किसी काम का नहीं होता।
  • अभिमान में नहीं बोल रहे: शास्त्री ने कहा कि हमारा दरबार लगाने का कारण यही है कि लोग हमारे खिलाफ सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग करते हैं। जुलूस निकालते हैं। आंदोलन करते हैं, क्योंकि हमने उनकी दुकानों पर ताले लगवा दिए। हमने बात लॉजिक से कही। गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि अपने धर्म में मरना सही है। हमारे गुरु ने जो शिक्षा दी, हम उसी पर चलेंगे। हम अभिमान में नहीं बोल रहे, हम स्वाभिमान में बोल रहे हैं। हम जब तक जिएंगे, तब तक धर्मांतरण जैसा काला बाजार नहीं चलने देंगे।
  • पैंट गीली करके ही वापस भेजेंगे: शास्त्री ने कहा कि हम एक बार पंजाब के इस मंच से उन हली-उल्लाह वालों को कहना चाहते हैं कि सनातन धर्म के संतों को छोड़कर, गुरु परंपराओं को छोड़कर, सिख परंपराओं को छोड़कर दुनिया में किसी में ताकत नहीं है जो हमारे दरबार का सामना कर सके। जब तुम हमारे पास आओगे तो तुम्हारे बारे में इतना बताएंगे कि तुम अपनी लुगाई (पत्नी) को मुंह नहीं दिखा पाओगे। पैंट गीली करके ही वापस भेजेंगे।
  • भारत के लोगों को उल्लू बनाते हो: उन्होंने कहा कि पहले जब मैं भारत में दरबार लगाता था तो लोग मेरा मजाक बनाते थे कि भारत के लोगों को उल्लू बनाते हो। आजकल मैं भारत में दरबार कम लगाता हूं, अंग्रेजों को ज्यादा उल्लू बनाता हूं। अब तो तुम्हें कोई टेंशन या खुजली तो नहीं हो रही। अगर हो रही हो तो अपनी ठठरी भर।
  • हनुमान जी ने जिस काम के लिए भेजा है, वह करके जाऊंगा: धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, “तुम्हारी टेंशन में हम टेंशन नहीं लेते। तुम लाख पहरे लगाओ हमें मिटाने के लिए, लेकिन हनुमान जी ने हमें जिस काम के लिए भेजा है, वह काम करके ही जाएंगे। हमारे जैसे आदमी का विवाद होना लाजमी है, क्योंकि हम बातें ठीक बोलते हैं। हम कुत्ते को कुत्ता जी नहीं कह सकते। नंगे को नंगा ही कहेंगे, नंगा जी नहीं कह सकते।”
  • बाबाओं से लोगों का भला नहीं होगा: मैं कोई चमत्कार दिखाने नहीं आया हूं। मैं सीधा कहता हूं कि बाबाओं से लोगों का भला नहीं होगा। भला होना है तो बजरंग बाबा से होना है। मेरे भी चक्कर में लोग न पड़ें। मैं इसलिए यहां नहीं आया कि मेरे से जुड़ो। मैं इसलिए आया हूं कि तुम लोग हनुमान दादा की महिमा को समझ सको। मैं बिना अंग्रेजी के 16 देश निपटा आया। तीन देशों के प्रधानमंत्रियों से मिल आया। जब मुझ जैसे अनपढ़ पर भगवान जी की कृपा हो सकती है तो तुम भी उनके बन जाओ।
  • अस्पताल में मंदिर नहीं, मंदिर में अस्पताल होना चाहिए: धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि मैंने संकल्प लिया है कि मंदिर नहीं बनाना। अगर बन गया तो कोई बुराई भी नहीं, लेकिन अब सनातनियों को एक क्रांति लानी चाहिए कि अस्पताल में मंदिर नहीं, बल्कि मंदिर में अस्पताल होना चाहिए। जहां दवा भी मिले और कृपा भी मिले।
  • गुरुद्वारा जहां होगा, वहां सेवा होगी: अंत में शास्त्री ने कहा कि में सिख भाइयों से सीखना चाहिए कि कैसे लंगर सेवा होती है और कैसे बैठने की व्यवस्था होती है। गुरुद्वारा जहां होगा, वहां सेवा होगी। सनातनियों को भी यह बात समझनी चाहिए। जहां मंदिर हो, वहां सेवा होनी चाहिए। मैं किसी को चमत्कार में फंसाने नहीं आया, उन्हें जगाने आया हूं।
परेशानियों को लेकर अर्जियां लगा रहे लोग बता दें कि लुधियाना में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा वर्धमान-ग्लाडा मैदान में श्री हनुमान जी की कथा सुनाई जा रही है। आज कथा का चौथा दिन है। रोजाना हजारों लोग नतमस्तक होकर बाला जी का आशीर्वाद ले रहे हैं और अपनी परेशानियों को लेकर अर्जियां लगा रहे हैं।
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