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‘वक्त जज्बात और तकदीर को बयां नहीं कर सकता’, Amitabh Bachchan ने क्यों कहा रेखा-जया की फिल्म की ये बात

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Amitabh Bachchanने अपनी 43 साल पुरानी ब्लॉकबस्टर फिल्म के डायलॉग को सुनाया।

अमिताभ बच्चन अपनी दमदार एक्टिंग, डायलॉग डिलीवरी के लिए जाने जाते हैं. अपनी प्रोफेशनल और पसर्नल लाइफ के बारे में वह किस्सों को अक्सर फैंस के साथ शेयर करते हैं. इन दिनों कौन बनेगा करोड़पति के सीजन 16 में वह नजर आ रहे हैं।

यहां भी कंटेस्टेंट के साथ वह अपने लाइफ के किस्सों को शेयर कर रहे हैं. हाल ही में उन्होंने अपनी 43 साल पुरानी ब्लॉकबस्टर फिल्म के डायलॉग को सुनाया. जिसको सुनते ही लोगों को रेखा का याद आ गई. अगर आपने शो नहीं देखा, तो चलिए आपको बताते हैं क्या था वो माजरा।

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अमिताभ बच्चन के साथ काम करना हर स्टार का सपना होता है. कुछ ऐसे ही सपनें ‘कौन बनेगा करोड़पति’ शो में पहुंचने वाले कंटेस्टेंट भी देखते हैं. किसी उन्हें एक बार छूना चाहता है, तो कोई उनके साथ डांस करने की मांग।

कोई उनके साथ तस्वीरों को लेकर यादों को समेटना चाहता है तो कोई उन्हें अपने हीरो के रूप में देखता है. लेटेस्ट एपिसोड में भी कुछ ऐसा ही देखा गया, जिसने साल 1981 में आई रेखा, अमिताभ और जया बच्चन की यादों को ताजा कर दिया।

दरअसल, कंटेस्टेंट दीप्ति सिंह शो में आई, तो उन्होंने बताया कि उनका सपना शो में आकर सच हो गया. क्योंकि वो हॉटसीट पर बिग बी का हाथ थामकर आना चाहती थीं. वह अपने साथ दो गुलाब भी लाई थी।

उन्होंने अमिताभ से गुजारिश की एक गुलाब वह उन्हें देगी और वह एक उन्हें दे दें. अमिताभ ने स्वीकार किया और उन्होंने दीप्ति को एक ऐसा डायलॉग के साथ गुलाब दिया, जिसमें रेखा का न चाहते हुए भी बातों-बातों में बिना नाम लिए जिक्र हो गया।

दीप्ति सिंह ने बिग बी को ‘अपने सपनों के राजा’ कहते हुए गुलाब का फूल दिया. उन्होंने कहा- ‘सर ये फूल मैं लाई थी अपने सपनों के राजा के लिए, जो रोज मेरे सपनों में आते हैं. सर एक आप मुझे दीजिए और मैं आपको एक दूंगी। ’ फिर अमिताभ बच्चन ने एक गुलाब दीप्ति से लिया और साल 1981 में आई ‘सिलसिला’ के अमित मल्होत्रा बन गए।

फूल देते हुए उन्होंने ‘सिलसिला’ के डायलॉग के साथ कहा- ‘हादसा बन के कोई ख्वाब बिखर जाए तो क्या हो, वक्त जज़्बात को तबदील नहीं कर सकता, दूर हो जाने से एहसास नहीं मर सकता… ये मोहब्बत है दिलों का रिश्ता… ये मोहब्बत है दिलों का रिश्ता ऐसा रिश्ता जो सरहदों में कभी तब्दील नहीं हो सकता.. तू किसी और की रातों का हसीन चांद सही, मेरे हर रंग में शामिल तू है.. तुझसे रोशन हैं मेरे ख्वाब मेरी उम्मीदें , तू किसी भी राह से गुजर, मेरी मंजिल तू है…’

अमिताभ बच्चन से डायलॉग सुनने के बाद दीप्ति कहती हैं कि सर मैं बता नहीं सकती कि आज लाइफ में क्या हो गया है, जिसे सुनकर अमिताभ जोर से हंस पड़ते हैं।

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