मुसलमानों के पवित्र शहर मक्का पर हूती हमले के प्रयास ने सऊदी अरब की चिंता बढ़ा दी है.
मुसलमानों के पवित्र शहर मक्का में हूती विद्रोहियों के अटैक से सऊदी में टेंशन बढ़ गई है. कल सऊदी ने दावा किया था कि हूतियों ने मक्का में ड्रोन से हमले की कोशिश की लेकिन उसे मार गिराया गया. मगर अब जो खबर सामने आई है वो ये है कि उस अटैक से सऊदी की चिंता बढ़ गई है. बेशुमार दौलत होने के बाद भी सऊदी हूती ड्रोन-मिसाइल को रोकने के लिए इन चार देशों से मदद की गुहार लगाई है.
दो क्षेत्रीय अधिकारियों ने बताया कि सऊदी के पास मिसाइल रोकने वाले हथियार कम पड़ रहे हैं. यमन के हूती विद्रोहियों के साथ लंबे समय से चल रहे संघर्ष की वजह से उसने मदद के लिए पड़ोसी देशों और पश्चिमी देशों से सहायता मांगी है. अधिकारियों के मुताबिक, सऊदी अरब ने फ्रांस, ब्रिटेन, पाकिस्तान और मिस्र से अपील की है कि वे इलाके में हवाई सुरक्षा के लिए मदद भेजें.
सऊदी के पास हथियारों का स्टॉक बहुत कम
इससे हूतियों और ईरान समर्थित अन्य समूहों की मिसाइलों और ड्रोनों से बचाव में आसानी होगी. एक अधिकारी ने बताया कि यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि सऊदी अरब का सबसे बड़ा सहयोगी और हथियार सप्लायर अमेरिका है. ईरान के साथ छह महीने से चल रहे युद्ध में अमेरिका के पास भी मिसाइल रोकने वाले हथियारों का स्टॉक बहुत कम हो गया है.
हूतियों ने की मक्का पर हमले की कोशिश
दोनों अधिकारियों ने नाम छिपाने की शर्त पर यह बात कही, क्योंकि उन्हें मीडिया से बात करने की अनुमति नहीं थी. सऊदी अधिकारियों ने इस खबर पर अभी कोई जवाब नहीं दिया. सऊदी अरब और हूतियों के बीच यह लड़ाई ईरान युद्ध के बाद खुले नए मोर्चे का हिस्सा है. बुधवार को सऊदी अरब ने आरोप लगाया कि हूतियों ने ड्रोन से इस्लाम के सबसे पवित्र शहर मक्का पर हमला करने की कोशिश की.
क्षेत्रीय अधिकारियों में से एक ने कहा कि सऊदी अरब इस समय बहुत मुश्किल स्थिति में है, क्योंकि उसे न केवल अपने सैन्य अड्डों और महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों की रक्षा करनी है, बल्कि पूरे राज्य में तेल सुविधाओं की भी रक्षा करनी है. सहयोगी देशों ने राजनयिक समर्थन की पेशकश की है, लेकिन सैन्य सहायता के कोई संकेत नहीं हैं.
अमेरिका और पाकिस्तान ने क्या कहा?
मक्का पर हुए हमले की निंदा के बीच पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान सऊदी अरब के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है. फिलहाल, अमेरिका इस लड़ाई से दूर दिख रहा है. अमेरिका ने सऊदी अरब को अरबों डॉलर के हथियार बेचे हैं और अन्य प्रकार की सहायता देने का वादा किया है, लेकिन शीर्ष अमेरिकी अधिकारियों ने संघर्ष में शामिल होने से दूरी बनाई है.
हूती विद्रोहियों ने हमले से किया इनकार
सऊदी अरब ने कहा कि मक्का (पैगंबर मुहम्मद की जन्मभूमि) उसकी ‘रेड लाइन’ है और उसने उस ड्रोन को रोक लिया. हूतियों ने मक्का को निशाना बनाने से इनकार किया. मक्का यमन की सीमा से करीब 1100 किलोमीटर दूर है.