पंजाब में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले आम आदमी पार्टी ने चमकौर साहिब हलके में अपना संगठन मजबूत करने के लिए जसवीर सिंह गढ़ी को हलका इंचार्ज नियुक्त किया है।

गढ़ी फिलहाल पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन हैं और बहुजन समाज पार्टी के पंजाब प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं।चमकौर साहिब में अनुसूचित जाति के मतदाताओं की संख्या अधिक है और पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी भी इसी हलके से चुनाव लड़ते रहे हैं। ऐसे में AAP ने दलित चेहरे को हलके की जिम्मेदारी देकर यहां अपना आधार मजबूत करने की रणनीति बनाई है।
गढ़ी 1 जनवरी 2025 को सीएम भगवंत मान की मौजूदगी में समर्थकों के साथ AAP में शामिल हुए थे और मार्च 2025 में उन्हें अनुसूचित जाति आयोग का चेयरमैन बनाया गया। आयोग के चेयरमैन रहते हुए वह अनुसूचित जाति से जुड़े मामलों में कई नेताओं और जनप्रतिनिधियों को तलब करने के कारण भी सुर्खियों में रहे हैं।
जानिए कौन हैं जसवीर सिंह गढ़ी
  • पंजाब सरकार के पशुपालन विभाग में वेटरनरी इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत रहे। सक्रिय राजनीति में आने के लिए 2019 में इस्तीफा दिया।
  • जून 2019 में बसपा सुप्रीमो मायावती ने उन्हें पंजाब प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया। करीब 5 साल तक प्रदेश संगठन का नेतृत्व किया।
  • 2022 में बसपा के टिकट पर फगवाड़ा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं मिली।
  • 2022 में उनके प्रदेश अध्यक्ष रहते बसपा ने शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन में विधानसभा चुनाव लड़ा।
  • 2024 में आनंदपुर साहिब लोकसभा सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली।
  • नवंबर 2024 में अनुशासनहीनता के आरोपों के चलते बसपा ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया।
  • 1 जनवरी 2025 में सीएम भगवंत मान की मौजूदगी में समर्थकों के साथ आम आदमी पार्टी में शामिल हुए।
  • मार्च 2025 में पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन नियुक्त किए गए।
गढ़ी को क्यों बनाया हलका इंचार्ज, जानिए
  • दलित समुदाय के प्रमुख चेहरों में शामिल: जसवीर सिंह गढ़ी को चमकौर साहिब विधानसभा क्षेत्र का हलका इंचार्ज बनाए जाने के पीछे आम आदमी पार्टी की सोची-समझी राजनीतिक और सामाजिक रणनीति मानी जा रही है। गढ़ी पंजाब में दलित समुदाय के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं और बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। ऐसे में पार्टी उनके राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल दलित वोट बैंक को मजबूत करने के लिए करना चाहती है।
  • हलके में अनुसूचित जाति के वोटर अधिक: चमकौर साहिब का जातीय समीकरण भी अहम है। इस विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति के मतदाताओं की संख्या काफी अधिक है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी भी इसी क्षेत्र से चुनाव लड़ते रहे हैं। ऐसे में AAP ने गढ़ी जैसे दलित चेहरे को हलके की कमान देकर यहां अपना संगठन मजबूत करने की रणनीति बनाई है।
  • पार्टी में सक्रियता का मिला इनाम: गढ़ी 1 जनवरी 2025 को AAP में शामिल हुए थे। पार्टी में आने के बाद उन्होंने दिल्ली और पंजाब में संगठन के लिए सक्रियता से काम किया। हलका इंचार्ज की जिम्मेदारी को पार्टी में उनके काम और सक्रियता के इनाम के तौर पर भी देखा जा रहा है।
  • एससी आयोग की छवि का भी मिलेगा फायदा: गढ़ी फिलहाल पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन हैं। इस दौरान उन्होंने लोक अदालतों और खुले दरबारों के जरिए दलितों और गरीबों की शिकायतों पर सुनवाई की है। इससे उनकी जमीनी स्तर पर एक ऐसे नेता की छवि बनी है, जो लोगों की समस्याओं को उठाता है। AAP इसी छवि का राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है।
  • 2027 के चुनाव की तैयारी: विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए पार्टी ने अभी से हलके में संगठन को मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। हलका इंचार्ज की जिम्मेदारी मिलने के बाद गढ़ी के पास क्षेत्र में पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की जिम्मेदारी होगी। साथ ही, इसे आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट की संभावित दावेदारी के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।
इन नेताओं को तलब कर सुर्खियों में रहे गढ़ी
  • प्रताप सिंह बाजवा: फरवरी 2026 में जसवीर सिंह गढ़ी ने कथित जातिवादी टिप्पणी के मामले में प्रताप सिंह बाजवा को नोटिस जारी किया। बाजवा को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर जवाब देने को कहा गया था। इससे पहले तरनतारन उपचुनाव के दौरान भी उन्हें नोटिस जारी हुआ था।
  • रवनीत सिंह बिट्टू: जून 2026 में धूरी नगर परिषद चुनाव के दौरान बिट्टू के कथित विवादित बयान पर गढ़ी ने स्वतः संज्ञान लिया। आयोग ने उन्हें 4 जून को पेश होने का निर्देश दिया। बिट्टू पहले ही सार्वजनिक रूप से माफी मांग चुके थे और बाद में आयोग के सामने पेश हुए।
  • राजा वड़िंग: नवंबर 2025 में तरनतारन उपचुनाव के प्रचार के दौरान कथित जातिवादी टिप्पणी के मामले में गढ़ी ने अधिकारियों को तलब किया। हालांकि, मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने चुनाव प्रक्रिया में दखल का हवाला देकर समन वापस लेने को कहा। मई 2026 में वायरल ऑडियो मामले में भी मुक्तसर के SSP को पेश होने के लिए कहा गया था।
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